सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु की उस अर्जी पर कर्नाटक सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा, जिसमें कावेरी नदी से मिलने वाले उसके हिस्से के पानी में कमी का आरोप लगाया गया है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि तमिलनाडु की ओर से उठाई गई पानी की कमी की शिकायत पर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) को फैसला करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
तमिलनाडु की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सी एस वैद्यनाथन ने कोर्ट को बताया कि राज्य के आकलन के मुताबिक करीब 20 TMC पानी की कमी है। उन्होंने कहा कि पानी नहीं मिलने के कारण राज्य की शुरुआती खरीफ फसल पहले ही प्रभावित हो चुकी है।
बेंच ने कहा कि किसी पक्ष को अपनी शिकायत CWMA के सामने तय कराने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु ने पानी की कमी का मुद्दा उठाया है और इस पर CWMA को निर्णय लेना होगा।
कर्नाटक ने सूखे की स्थिति का दिया हवाला
कर्नाटक की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि राज्य CWMA के निर्देशों के अनुसार पानी छोड़ रहा है, जबकि इस वर्ष कर्नाटक गंभीर सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि CWMA एक विशेषज्ञ निकाय है, जहां दोनों राज्यों की बात सुनी जा रही है और सभी परिस्थितियों पर विचार किया जा रहा है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) हर 15 दिन में स्थिति की समीक्षा कर रही है।
तमिलनाडु की ओर से हालांकि कहा गया कि CWMA को कथित पानी की कमी के मुद्दे पर अलग से आदेश पारित करना चाहिए।
6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का मौजूदा निर्देश
8 सितंबर को CWMA ने CWRC की उस सिफारिश को बरकरार रखा था, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कर्नाटक इस निर्देश के अनुसार 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ रहा है।
इससे पहले 25 अगस्त को CWMA ने CWRC की उस सिफारिश को भी मंजूरी दी थी, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
उससे पहले CWRC ने 12 अगस्त से 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने का निर्देश दिया था। बाद में CWMA ने भी उस निर्णय को बरकरार रखा था।
17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से कावेरी जल छोड़ने संबंधी CWMA के निर्देश का पालन सुनिश्चित करने को कहा था।
3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था तमिलनाडु
तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कर्नाटक को तत्काल कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की थी।
राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि कम बारिश वाले इस वर्ष में उसे कावेरी जल का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।
तमिलनाडु ने यह भी दावा किया था कि CWRC की ओर से तय की गई पानी की मात्रा और कर्नाटक द्वारा वास्तव में छोड़ा जा रहा पानी दोनों ही बहुत कम हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट 12 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई करेगा। इससे पहले कर्नाटक को तमिलनाडु की अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।

