राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के बाद श्रीगंगानगर पुलिस ने उस व्यक्ति को खोज निकाला, जो श्रीविजयनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वोट डालने जाते समय कथित रूप से लापता हो गया था। विजय कुमार नामक इस व्यक्ति ने बाद में तय समय के भीतर अपना वोट डाला, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 22 सितंबर को उसकी पत्नी की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका का निस्तारण कर दिया।
जस्टिस नूपुर भाटी और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच ने विजय कुमार की पत्नी शशि की याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई की थी। बाबा रामदेव जयंती के कारण उस दिन अवकाश था, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से मामले की तात्कालिकता बताए जाने पर चीफ जस्टिस के निर्देश के बाद सुनवाई की गई।
शाम 4 बजे तक खोजने का दिया था निर्देश
नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए मतदान शाम 5 बजे तक होना था। इसे देखते हुए हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि विजय कुमार को शाम 4 बजे तक खोज लिया जाए और उन्हें मतदान का मौका दिया जाए।
यह निर्देश उस समय दिया गया जब पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश हुए और बताया कि विजय कुमार की तलाश के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को अनुपालन रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का भी निर्देश दिया और मामले को अगले दिन के लिए सूचीबद्ध किया।
पत्नी ने बजूवाला के पास जबरन ले जाने का आरोप लगाया
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विजय कुमार 21 सितंबर की सुबह उसी राजनीतिक दल के अन्य उम्मीदवारों के साथ जा रहे थे। आरोप था कि श्रीविजयनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर बजूवाला के पास अज्ञात लोगों ने तीन मतदाताओं पर फायरिंग की और उन्हें जबरन अपने साथ ले गए।
हाईकोर्ट ने इन बातों को याचिकाकर्ता की ओर से किए गए दावों के रूप में दर्ज किया। कोर्ट ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि कथित फायरिंग या अपहरण की घटना साबित हो गई थी।
शशि ने कोर्ट को बताया कि घटना के बाद विजय कुमार का कोई पता नहीं चल रहा था और उनका मोबाइल फोन भी बंद था। उनके वकील ने यह भी कहा कि संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दी गई थी, लेकिन शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
मतदान का समय बढ़ाकर शाम 5 बजे किया गया
कोर्ट में बताया गया कि मतदान का समय पहले सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक तय था। विजय कुमार से जुड़ी कथित घटना के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मतदान की समयसीमा बढ़ाकर शाम 5 बजे कर दी।
मामले की तात्कालिकता को देखते हुए बेंच ने अपर महाधिवक्ता से पुलिस अधीक्षक की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट दोपहर 2 बजे फिर बैठी और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को लेकर पुलिस अधिकारी से सवाल किया।
पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को बताया कि शिकायत पर बाद में कार्रवाई की गई और एफआईआर दर्ज कर ली गई।
उन्होंने यह भी बताया कि मंगतराम और प्यारे लाल, जो कथित तौर पर विजय कुमार के साथ यात्रा कर रहे थे और उनके साथ ही जबरन ले जाए जाने का आरोप था, पुलिस ने उन्हें खोज लिया था और वे अपना वोट डाल चुके थे।
पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि विजय कुमार की तलाश के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मतदान समाप्त होने में कम समय बचा होने के कारण बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिया कि उन्हें शाम 4 बजे तक खोजा जाए और चुनाव में मतदान का अवसर दिया जाए।
वोट डालने के बाद याचिका का निस्तारण
22 सितंबर को जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई तो हाईकोर्ट को बताया गया कि विजय कुमार को खोज लिया गया था और उन्होंने बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर अपना वोट भी डाल दिया था।
इसके बाद बेंच ने हैबियस कॉर्पस याचिका का निस्तारण कर दिया।
हाईकोर्ट के आदेश में कथित घटना के लिए किसी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। कोर्ट ने यह भी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया कि विजय कुमार का अपहरण हुआ था या कथित फायरिंग के लिए कौन जिम्मेदार था। इस कार्यवाही का दायरा विजय कुमार को तत्काल खोजने और उन्हें मतदान का अवसर दिलाने तक सीमित रहा।

