तृणमूल नाम और सिंबल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा- अंतिम फैसले में कितना वक्त लगेगा

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ को फ्रीज किए जाने के मामले में चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने आयोग से पूछा है कि दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच जारी इस विवाद पर अंतिम फैसला सुनाने में उसे कितना समय लगेगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएम नायडू से इस संबंध में निर्देश लेकर समयसीमा से अवगत कराने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी यह पूछताछ केवल अंतिम फैसले की समयसीमा जानने तक ही सीमित है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब सोमवार, 28 सितंबर को होगी।

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी

यह कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी द्वारा 18 सितंबर को दायर रिट याचिका से उपजा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के 17 सितंबर के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (एआईटीसी) और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी।

याचिका में चुनाव आयोग के साथ-साथ रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

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सिब्बल की दलील: चुनाव के बीच ऐसी रोक से बंद होते हैं कानूनी रास्ते

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष आयोग के कदम पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने दलील दी कि यदि चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश को बरकरार रहने दिया गया, तो आयोग हर चुनाव में इसी तरह के फैसले लेने लगेगा।

सिब्बल ने कहा कि मतदान प्रक्रिया के बीच राजनीतिक दलों के नाम और पहचान को फ्रीज कर देना उन्हें कानूनी उपचार के बुनियादी अधिकार से वंचित करता है, जो कानून की दृष्टि में कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि यदि इस प्रक्रिया को अनुमति दी गई, तो आयोग आने वाले समय में दूसरे राज्यों के चुनावों में भी ऐसे ही आदेश पारित करेगा।

उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को दिए गए अस्थाई नाम और चुनाव चिह्न

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यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सहित अन्य सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर सामने आया है। आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों से कहा था कि जब तक इस विवाद का पूर्ण निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वे तीन वैकल्पिक नाम और तीन मुक्त (फ्री) चुनाव चिह्नों की अपनी वरीयता सूची सौंपें।

इसके बाद आयोग ने 18 सितंबर को दोनों पक्षों को अंतरिम व्यवस्था के तहत नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न सौंपा गया। वहीं, रितब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आबंटित किया गया।

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सिंबल ऑर्डर 1968 के तहत अलग से होगा मूल अधिकार का फैसला

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल आगामी उपचुनावों को संपन्न कराने के लिए की गई एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इससे यह निर्धारित नहीं होता कि पार्टी के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर किस गुट का वैधानिक अधिकार है। मूल दल और सिंबल के वास्तविक स्वामित्व का फैसला चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत अलग से की जाने वाली विधिवत सुनवाई के बाद ही तय होगा।

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