पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को लुधियाना के एक कारोबारी को फैक्ट्री में हुई चोरी के बदले 2.04 लाख रुपये का क्लेम अदा करने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी चोरी में सुरक्षा एजेंसी द्वारा भेजा गया गार्ड शामिल पाया जाता है, तो भी बीमा कंपनी नियमों की आड़ लेकर अपनी देनदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
बीमा कंपनियों के रवैये पर आयोग की तल्ख टिप्पणी
न्यायिक सदस्य हरिंदरपाल सिंह महल और सदस्य किरण सिबल की पीठ ने 2 सितंबर को यह फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि बीमा कंपनियां पॉलिसी जारी करते समय ग्राहकों को सुनहरे सपने (ग्रीन पाश्चर्स) दिखाती हैं, लेकिन जब नुकसान की भरपाई या क्लेम निपटाने की बारी आती है, तो वे एक के बाद एक बहाने तलाशने लगती हैं। आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया, जो उसने लुधियाना जिला उपभोक्ता आयोग के 3 नवंबर 2023 के फैसले के खिलाफ दाखिल की थी।
कंपनी की आपत्तियां और अपवर्जन शर्त खारिज
बीमा कंपनी ने पॉलिसी की ‘अपवर्जन शर्त’ (एक्सक्लूजन क्लॉज) का हवाला देकर क्लेम देने से मना कर दिया था। कंपनी का कहना था कि सेंधमारी में शामिल व्यक्ति सुरक्षा एजेंसी द्वारा तैनात किया गया स्थानापन्न गार्ड था, और नियम के मुताबिक परिसर में वैध रूप से उपस्थित या व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति की संलिप्तता पर कवर लागू नहीं होता। कंपनी ने यह तर्क भी दिया कि ताले चाबियों से खोले गए थे, इसलिए इसे जबरन प्रवेश नहीं माना जा सकता। इसके अतिरिक्त, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने में एक दिन की देरी और एफआईआर में चोरी हुए सामान की मात्रा व कीमत का उल्लेख न होने पर भी सवाल उठाए गए थे।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने इन दलीलों को नकार दिया। पीठ ने पाया कि सुरक्षा एजेंसी द्वारा भेजे गए व्यक्ति ने ड्यूटी पर मौजूद गार्ड नान बहादुर सिंह को काबू में किया और उससे जबरन चाबियां छीनकर चोरी की। आयोग ने माना कि यह स्पष्ट रूप से बलपूर्वक की गई सेंधमारी है। वहीं एफआईआर में एक दिन के अंतर पर आयोग ने कहा कि घटना के तुरंत बाद पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी गई थी और जांच शुरू हो चुकी थी, इसलिए इस तकनीकी देरी का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
घटना और क्लेम विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 21 मार्च 2018 का है, जब लुधियाना स्थित मैसर्स जी के ट्रेडर्स के परिसर में चोरी हुई थी। यह फर्म साइकिल व रिक्शा के कलपुर्जों के निर्माण, बिक्री और निर्यात का व्यवसाय करती है। फर्म के पास 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2018 तक की अवधि के लिए अपने स्टॉक और माल के वास्ते सेंधमारी बीमा कवर मौजूद था।
शिकायत के अनुसार, सुरक्षा गार्ड को बंधक बनाकर उपद्रवियों ने करीब 2.04 लाख रुपये का माल पार कर दिया था। लुधियाना पुलिस कंट्रोल रूम को तत्काल सूचित किया गया और 23 मार्च 2018 को एफआईआर दर्ज हुई। घटना की सूचना मिलने पर बीमा कंपनी के सर्वेक्षक ने घटनास्थल का मुआयना किया और 8 अगस्त 2018 की अपनी रिपोर्ट में 2.04 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया। इसके बावजूद कंपनी ने 27 सितंबर 2018 को पत्र जारी कर क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने चोरी होने पर कोई सवाल नहीं उठाया था, बल्कि केवल नियमों की व्याख्या के आधार पर भुगतान से छूट मांगी थी।
भुगतान और मुआवजे का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले पर मुहर लगाते हुए राज्य आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह पीड़ित फर्म को नुकसान के 2,04,290 रुपये और 10,000 रुपये का मुआवजा अदा करे।
कंपनी को यह राशि 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी। समय पर भुगतान न किए जाने की स्थिति में क्लेम की रकम पर 8 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देय होगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अपील प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनी द्वारा जमा कराई गई 1,08,800 रुपये की वैधानिक राशि और उस पर अर्जित ब्याज, आदेश की प्रमाणित प्रति भेजे जाने के 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता फर्म को सौंप दिया जाए।

