बेंगलुरु जेल ड्रग्स तस्करी मामला: सह-आरोपियों के बयानों पर दर्ज मुकदमा कर्नाटक हाईकोर्ट ने किया रद्द

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में 2022 में मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में नामजद 36 वर्षीय आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

जस्टिस राजेश राय के. ने 15 सितंबर को जारी अपने आदेश में आरोपी अंजी एम. की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अंजी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में दर्ज किया कि यदि आरोपपत्र के सभी आरोपों को पहली नजर में सच मान भी लिया जाए, तो भी याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। अदालत ने अंजी के खिलाफ दर्ज मुकदमे को तो खारिज कर दिया, लेकिन यह साफ किया कि मामले के अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी।

सह-आरोपियों के इकबालिया बयान पर नहीं चल सकता मुकदमा

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में रहने वाले व्यक्ति को 'अभद्र आचरण' के लिए 6 महीने की जेल की सजा, 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता के. रविशंकर ने अदालत में दलील दी कि मूल एफआईआर में अंजी का नाम शामिल नहीं था। जांच के दौरान केवल सह-आरोपियों द्वारा दिए गए स्वैच्छिक बयानों के आधार पर ही बाद में उनका नाम इस मामले में घसीटा गया। बचाव पक्ष ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत महज सह-आरोपियों के इकबालिया बयानों को आधार बनाकर किसी व्यक्ति पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच के बाद दाखिल की गई चार्जशीट में आरोपी की संलिप्तता के पर्याप्त विवरण मौजूद हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि अंजी के खिलाफ केवल इतना आरोप है कि मामले की आरोपी नंबर दो उसकी मां है और आरोपी नंबर छह ने उसकी मां से नशीला पदार्थ खरीदा था। अदालत ने रेखांकित किया कि आरोपी नंबर दो, चार और छह के स्वैच्छिक बयानों के अलावा याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई स्वतंत्र या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।

READ ALSO  जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पत्रकार माजिद हैदरी की पीएसए हिरासत को रद्द किया

जेल के मुख्य द्वार पर तलाशी के दौरान पकड़ी गई थी नशीली सामग्री

यह मामला 2 फरवरी 2022 का है, जब कर्नाटक स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (केएसआईएसएफ) के जवान वीरेश पी. सी. परप्पना अग्रहारा जेल के मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। चेकिंग के दौरान उन्होंने देखा कि जेल सहायक गंगाधर गुरुसिद्धप्पा हेब्बल अपनी पैंट की जेब में नींबू और फूल लेकर अंदर जा रहा था।

संदेह होने पर सुरक्षाकर्मियों ने जब हेब्बल की गहन तलाशी ली, तो उसकी जेब से सफेद और काले रंग के प्लास्टिक कवर में लिपटे दो पैकेट बरामद हुए। जांच में सामने आया कि इन पैकेटों में एलएसडी की स्ट्रिप्स और लगभग 50 से 75 ग्राम अफीम जैसा नशीला पदार्थ छिपाया गया था। इस खुलासे के बाद जेल अधिकारियों ने हेब्बल को हिरासत में ले लिया और परप्पना अग्रहारा जेल के अधीक्षक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। आगे की जांच के दौरान पुलिस ने अंजी सहित सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

आरोपपत्र में पेश किया गया तस्करी का नेटवर्क

READ ALSO  दिवाला और दिवालियापन संहिता के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया

अभियोजन पक्ष की थ्योरी के अनुसार, अंजी की मां सुमति (आरोपी नंबर दो) पर आरोप था कि उसने अपने बेटे अंजी के जरिए मालविन (आरोपी नंबर छह) तक मादक पदार्थ पहुंचाया था। इसके बाद मालविन ने यह खेप जेल सहायक हेब्बल को सौंपी, जिसे इसे जेल परिसर के भीतर ले जाना था। योजना के तहत हेब्बल को यह सामग्री जेल के कैदी शिवकुमार को देनी थी, जिसे आगे सतीशा नाम के कैदी तक पहुंचाना था ताकि वह जेल के अंदर बंद अन्य कैदियों को इसे बेच सके।

हाईकोर्ट ने पाया कि इस कथित नेटवर्क से अंजी को जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद नहीं है और केवल अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने अंजी के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles