दिल्ली हाईकोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल और गोपाल अंसल समेत अन्य दोषियों को अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय करते हुए स्पष्ट किया कि उस दिन कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।
जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने दोषियों को एक सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने और अगली तारीख से बहस शुरू करने को कहा। साथ ही, राज्य सरकार के वकील को सभी पक्षों की ओर से जरूरी दस्तावेजों का एक साझा संकलन तैयार कर दो सप्ताह के भीतर कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया।
यह मामला उपहार सिनेमा अग्निकांड से जुड़े सबूतों से कथित छेड़छाड़ के लिए दी गई सजा को चुनौती देने वाली अलग-अलग याचिकाओं से संबंधित है। अंसल बंधुओं ने अपनी सजा को चुनौती दी है, जबकि दिल्ली पुलिस और एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजेडी (AVUT) ने सजा बढ़ाने की मांग की है। पूर्व कोर्ट कर्मचारी दिनेश चंद्र शर्मा और अंसल के तत्कालीन कर्मचारी पी पी बत्रा की सजा के खिलाफ याचिकाएं भी हाईकोर्ट में लंबित हैं।
सजा घटाने के फैसले पर सवाल
अभियोजन पक्ष ने सेशन कोर्ट द्वारा सजा कम किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। अभियोजन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दयान कृष्णन ने इससे पहले कहा था कि अपीलीय अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दर्ज दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन गलत आधार पर दोषियों की सजा कम कर दी।
AVUT की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने भी सजा बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिला जज ने इस बात पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया कि सबूतों से छेड़छाड़ बेहद गंभीर अपराध है और इसका असर पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली पर पड़ता है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुनाई थी सात साल की सजा
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 8 नवंबर 2021 को सुशील अंसल और गोपाल अंसल को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।
हालांकि, 19 जुलाई 2022 को सेशन कोर्ट ने इस आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने अंसल बंधुओं के साथ दिनेश चंद्र शर्मा और पी पी बत्रा को 8 नवंबर 2021 से जेल में बिताई गई अवधि को पर्याप्त मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया।
सेशन कोर्ट ने जुर्माने की राशि में कोई बदलाव नहीं किया। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुशील और गोपाल अंसल पर 2.25-2.25 करोड़ रुपये तथा शर्मा और बत्रा पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
किन दस्तावेजों से छेड़छाड़ का आरोप
चार्जशीट के अनुसार, जिन दस्तावेजों से कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई उनमें घटना के तुरंत बाद हुई बरामदगी का विवरण दर्ज करने वाला पुलिस मेमो, उपहार सिनेमा के अंदर लगे ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत से जुड़े दिल्ली फायर सर्विस के रिकॉर्ड, मैनेजिंग डायरेक्टर की बैठकों के मिनट्स और चार चेक शामिल थे।
ये दस्तावेज उपहार सिनेमा अग्निकांड के मुख्य मामले से जुड़े थे। उस मामले में अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनाई थी।
13 जून 1997 को हिंदी फिल्म ‘बॉर्डर’ की स्क्रीनिंग के दौरान उपहार सिनेमा में आग लग गई थी। इस हादसे में 59 लोगों की मौत हुई थी।

