पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2023 की बॉलीवुड फिल्म ‘यारियां 2’ की निर्माण टीम और मुख्य अभिनेता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यूट्यूब पर जारी एक गाने में अभिनेता द्वारा कृपाण धारण करना रचनात्मक और कलात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा था, न कि जानबूझकर किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का प्रयास।
जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की पीठ ने 7 सितंबर को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सामान्य और समझदार व्यक्ति की नजर में इस चित्रण को उकसावे वाला या बेहद आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि किसी एक व्यक्ति की निजी शिकायत को पूरे समुदाय की सामूहिक राय या भावना नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का फैसला और मुख्य टिप्पणियां
पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि फिल्म के किसी दृश्य या गीत में गैर-अमृतधारी सिख को ‘श्री साहिब’ (कृपाण) पहने दिखाना सिख धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, पांच पवित्र ककारों में शामिल श्री साहिब का यह अनपेक्षित चित्रण महज रचनात्मक आजादी और कलात्मक सोच की अभिव्यक्ति था। इसमें शिकायतकर्ता अथवा सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कोई दुर्भावनापूर्ण या जानबूझकर किया गया इरादा साबित नहीं होता।
अदालत ने पाया कि कानूनन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जो दुर्भावनापूर्ण नीयत जरूरी होती है, वह इस मामले में पूरी तरह अनुपस्थित है। इसी आधार पर अदालत ने न्याय और निष्पक्षता के हित में संबंधित एफआईआर और उससे जुड़ी तमाम कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
शिकायत और विवाद की पृष्ठभूमि
यह कानूनी विवाद टी-सीरीज कंपनी द्वारा यूट्यूब पर जारी फिल्म ‘यारियां 2’ के एक गाने के दृश्य से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि गाने के दृश्य में क्लीन शेव बॉलीवुड अभिनेता मीजान जाफरी बिना पगड़ी पहने और सिख मर्यादाओं के विपरीत गले में श्री साहिब धारण किए नजर आ रहे थे।
सिख धार्मिक परंपराओं के हवाले से शिकायत में कहा गया था कि पवित्र पांच ककारों में से एक होने के कारण श्री साहिब को केवल अमृतधारी सिख ही धारण कर सकते हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि निर्देशक राधिका राव, विनय सप्रू और निर्माता भूषण कुमार ने अभिनेता के साथ मिलकर जानबूझकर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए यह गीत तैयार किया था।
निर्माताओं और अभियोजन पक्ष की दलीलें
फिल्म निर्माताओं और अभिनेता के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि दृश्य में किसी भी तरह से सिख धर्म या उसके पवित्र प्रतीकों के प्रति कोई अपमानजनक संदेश नहीं दिया गया था। उन्होंने बताया कि यह दृश्य धार्मिक रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी न होने के कारण अनजाने में फिल्माया गया था, न कि किसी दुर्भावना से।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि विवाद सामने आते ही संबंधित दृश्यों को गाने से हटा दिया गया था और अनजाने में हुई इस भूल के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली गई थी, साथ ही भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन दिया गया था। वकीलों ने यह तर्क भी रखा कि इसी घटना और समान आरोपों को लेकर पहले भी एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, इसलिए एक ही मामले पर यह दूसरी एफआईआर कानूनन टिकने योग्य नहीं है।
दूसरी तरफ, उप महाधिवक्ता (डिप्टी एडवोकेट जनरल) हरदीप सिंह वाधवा ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि बिना पगड़ी के और क्लीन शेव अभिनेता को गले में पवित्र श्री साहिब पहनाना सिख मर्यादाओं के खिलाफ है, जिससे शिकायतकर्ता और सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि निर्देशक, निर्माता और अभिनेता इसके लिए पूरी तरह जवाबदेह हैं और जब मामले की जांच चल रही थी, तब प्रारंभिक स्तर पर ही एफआईआर को रद्द नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के इन तर्कों को खारिज करते हुए पाया कि इसमें किसी भी वर्ग की धार्मिक आस्था को नीचा दिखाने या भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई पूर्व-नियोजित या दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था।

