दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर साल 2025 में हुए हमले के मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस अनूप जे. भम्भानी ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच बेहद जरूरी है। कोर्ट ने रोहिणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) को निर्देश दिया है कि वह इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में तेजी लाए और चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करे।
कोर्ट सक्रिय राजेशभाई खीमजीभाई और तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन दोनों आरोपियों ने निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप (Charges) तय किए जाने को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस भम्भानी ने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन “सारे रहस्यों का भंडार” होते हैं। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दोनों आरोपी दिल्ली के निवासी नहीं हैं, ऐसे में उनके बीच के संबंधों और दिल्ली में उनकी मौजूदगी के पीछे की वजहों को डिकोड करने के लिए डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण हैं।
अदालत ने बचाव पक्ष की दलील पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं तब तक किसी कार्यवाही पर रोक लगाने में विश्वास नहीं करता, जब तक मुझे यह स्पष्ट न हो जाए कि कुछ गलत हो रहा है या होने वाला है। मुझे यहां ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता।” जस्टिस भम्भानी ने यह भी सवाल किया कि आरोपियों का दिल्ली आने का मकसद क्या था।
यह मामला 20 अगस्त 2025 का है, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सिविल लाइंस स्थित अपने कैंप कार्यालय में ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम कर रही थीं। इसी दौरान उन पर हमला किया गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घटना को उनकी “हत्या की एक सुनियोजित साजिश” करार दिया था।
दिल्ली पुलिस की जांच के अनुसार, इस हमले की योजना गुजरात के राजकोट में तैयार की गई थी। आरोप है कि शेख ने खीमजीभाई के खाते में ₹2,000 ट्रांसफर किए थे ताकि वह इस हमले को अंजाम दे सके। पुलिस ने इस मामले में अक्टूबर 2025 में 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
निचली अदालत ने 20 दिसंबर 2025 को प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। 26 दिसंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत औपचारिक रूप से चार्ज फ्रेम किए गए:
- धारा 61(2): आपराधिक साजिश
- धारा 221: लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना
- धारा 132: लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- धारा 109(1): हत्या का प्रयास
दोनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही है। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि यदि ट्रायल पर रोक नहीं लगाई गई, तो निचली अदालत 25 अप्रैल से गवाही दर्ज करना शुरू कर देगी। हालांकि, हाईकोर्ट के इस रुख के बाद अब तय कार्यक्रम के अनुसार मुकदमा आगे बढ़ेगा।

