मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से धर्म चुनने और जीवन जीने की पूरी कानूनी आजादी है। अदालत ने श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुसार दीक्षा लेकर साध्वी बनने का फैसला करने वाली 20 वर्षीय युवती को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही पुलिस को ताकीद की गई है कि यदि युवती के माता-पिता या रिश्तेदार उसके इस कदम में कोई अड़चन डालते हैं या दबाव बनाते हैं, तो उसे तत्काल कानूनी संरक्षण दिया जाए।
7 सितंबर को इस मामले पर आदेश पारित करते हुए जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने कहा कि कानून 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों में दखल देने की अनुमति किसी को नहीं देता। अदालत ने माना कि उसे माता-पिता और बेटी दोनों के प्रति पूरी सहानुभूति है, लेकिन कानून के तहत किसी बालिग के स्वतंत्र निर्णय और अधिकारों को बाधित नहीं किया जा सकता।
पारिवारिक दबाव और पाबंदी की जताई थी आशंका
यह पूरा मामला तनीषा नाम की युवती की याचिका पर सामने आया, जिसने सांसारिक जीवन का त्याग कर श्वेतांबर जैन साध्वी बनने का संकल्प लिया है। याचिका में बताया गया कि युवती के माता-पिता और करीबी रिश्तेदार भावनात्मक लगाव के कारण उसे दीक्षा लेने से रोकने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। युवती ने अदालत के समक्ष आशंका जताई कि उसके माता-पिता समाज में प्रभावशाली और रसूखदार व्यक्ति हैं, जिसके चलते वे उसकी आवाजाही पर पाबंदी लगा सकते हैं, उसे प्रताड़ित कर सकते हैं या जबरन दीक्षा लेने से रोक सकते हैं।
हाईकोर्ट में युवती की पैरवी कर रहे वकील आशीष जोशी ने बताया कि उनकी मुवक्किल ने सुरक्षा की मांग करते हुए पहले इंदौर के पुलिस कमिश्नर के समक्ष आवेदन दिया था। जब उस पर कोई फैसला नहीं हुआ, तब उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19, 21, 25 और 26 का हवाला देते हुए मौलिक अधिकारों—विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता, स्वतंत्र आवागमन और धार्मिक आजादी—के संरक्षण की गुहार लगाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत कार्रवाई का निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने रेखांकित किया कि 20 वर्षीय याचिकाकर्ता भारत की नागरिक है और जैन धर्म का पालन करते हुए अब साध्वी के रूप में जीवन समर्पित करने के लिए दीक्षा लेना चाहती है। अदालत ने कहा कि उसे अपनी आस्था के अनुसार आचरण करने और अपनी मर्जी से जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि परिवार या किसी अन्य की ओर से किसी भी तरह का दबाव, प्रताड़ना या गैर-कानूनी रुकावट डाली जाती है, तो युवती तुरंत संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) या नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क कर सकती है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि ऐसी किसी भी शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘लता सिंह’ और ‘शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ’ के ऐतिहासिक मामलों में तय किए गए सिद्धांतों के अनुरूप बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

