भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री डालने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत के निर्देश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपने वकीलों के जरिए आश्वासन दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर विवादित पोस्ट हटा लेंगे।
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने भाटिया की ओर से दायर सिविल मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए सौरव दास, आशुतोष रांका, सीजेपी और संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके को समन जारी किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका में दिपके के खिलाफ कोई ठोस आधार नजर नहीं आ रहा है।
अदालत ने अंतरिम राहत की अर्जी पर अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। इसके साथ ही अदालत ने भाटिया को यह छूट भी दी कि यदि सोशल मीडिया पर फर्जी ग्राफिक वाली अन्य पोस्ट अब भी मौजूद रहती हैं, तो वे सीधे ‘एक्स’ और ‘मेटा प्लेटफॉर्म्स’ से संपर्क कर सकते हैं।
अभिव्यक्ति का हक है लेकिन तथ्यों की पुष्टि जरूरी: हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गेडेला ने युवाओं की अभिव्यक्ति की आजादी और जिम्मेदारी पर अहम टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने और असहमति जताने का पूरा हक है, लेकिन बिना जांच-पड़ताल किए सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कह देना सही नहीं है।
अदालत ने सीजेपी नेताओं के वकीलों से कहा कि विरोध जताने के कई तरीके होते हैं और बात को सही व स्पष्ट ढंग से सामने रखा जाना चाहिए। जज ने कहा कि आज के दौर में युवाओं के भीतर काफी चिंता और बेचैनी देखने को मिलती है, लेकिन यह समझना होगा कि कोई भी व्यक्ति अचानक 60 साल का नहीं हो जाता। हर इंसान उसी उम्र और दौर से गुजरकर आगे बढ़ता है, और यही बात गौरव भाटिया पर भी लागू होती है। अदालत का कहना था कि ऐसे मामलों को कोर्ट में लाने के बजाय आपसी बातचीत से भी सुलझाया जा सकता था।
मध्यस्थता से इनकार, भाटिया ने की भविष्य की पोस्ट पर रोक की मांग
अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए गौरव भाटिया ने मामले को आपसी समझौते या मध्यस्थता (मीडिएशन) के लिए भेजने के न्यायिक सुझाव को साफ नकार दिया। उन्होंने मांग रखी कि अदालत प्रतिवादियों को भविष्य में इस मुद्दे पर मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करने से तुरंत रोके।
जब सीजेपी नेताओं के वकीलों ने यह साफ कर दिया कि वे भविष्य में कोई पोस्ट न करने का कोई लिखित वचन (अंडरटेकिंग) नहीं दे रहे हैं, तो जस्टिस गेडेला ने कहा कि अगर आगे कोई नई शिकायत सामने आती है तो भाटिया दोबारा अदालत का रुख करने के लिए स्वतंत्र हैं।
सुनवाई के दौरान नई पोस्ट डालने का आरोप
गौरव भाटिया ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने कभी कोई गलत तस्वीर या फर्जी बयान साझा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं, और बार-बार निशाना बनाए जाने के कारण यह गंभीर मानहानि का मामला बनता है।
भाटिया ने पीठ को यह भी बताया कि जब अदालत में इस मामले पर सुनवाई चल रही थी और उनके वकील निर्देश ले रहे थे, ठीक उसी दौरान दास ने ‘एक्स’ पर उनके खिलाफ एक और आपत्तिजनक पोस्ट साझा की। भाटिया ने कहा कि इस तरह का आचरण करने वाले किसी भी तरह की नरमी के हकदार नहीं हैं।
फर्जी बयानों से छवि बिगाड़ने का लगाया आरोप
यह पूरा विवाद एक ऐसे सोशल मीडिया ग्राफिक से शुरू हुआ, जिसमें गौरव भाटिया के नाम से एक फर्जी बयान जोड़ा गया था। यद्यपि सौरव दास ने 5 सितंबर को किए गए अपने ट्वीट को ‘एआई-जनरेटेड’ बताते हुए बाद में हटा दिया था, लेकिन भाटिया ने इसे नाकाफी मानते हुए बिना शर्त माफी और स्थायी रोक की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
भाटिया ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सीजेपी नेताओं की सोशल मीडिया पर लोगों को दुर्भावनापूर्ण पोस्ट के जरिए घेरने की पुरानी आदत रही है। याचिका के मुताबिक, ये नेता वास्तविक आलोचना या तार्किक असहमति जताने के बजाय लोगों के नाम से ऐसे मनगढ़ंत बयान फैलाते हैं जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं होते। इसके अलावा, याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि यह संगठन और इसके पदाधिकारी लगातार न्यायपालिका की गरिमा और उसके अधिकार को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां करते रहते हैं।
गौरतलब है कि एक ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी ने हाल ही में नीट पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की थी।

