मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी वेबसाइट में लगातार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों पर गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित IT स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वेबसाइट की समस्याओं के कारण ई-हियरिंग प्रभावित हो रही है और न्यायिक समय भी बर्बाद हो रहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट के IT सिस्टम की स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का भी आदेश दिया गया है।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने 8 सितंबर को पारित आदेश में कहा कि वेबसाइट की स्थिति संतोषजनक नहीं है। बेंच ने चीफ जस्टिस से संबंधित IT कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस या L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम से हाईकोर्ट के IT सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। थर्ड-पार्टी ऑडिट 30 दिनों के भीतर पूरा कर इसकी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करनी होगी।
विशेषज्ञों की इस टीम में भारत सरकार के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) और MASSCOM के अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।
सात दिनों में मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट
बेंच ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (ITCSA) के.एस. कुशवाहा को वेबसाइट और IT सिस्टम के कारण कोर्ट के कामकाज में आ रही बाधाओं की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सात दिनों के भीतर बेंच को रिपोर्ट सौंपी जाए।
ये निर्देश एक अलग आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई तकनीकी समस्याओं के बाद दिए गए। वह मामला एक आरोपी की सजा निलंबित करने और जमानत देने से संबंधित था।
सुनवाई के दौरान बेंच ने पाया कि हाईकोर्ट की वेबसाइट ई-हियरिंग को ठीक से सपोर्ट नहीं कर रही थी। ओपन कोर्ट में मौजूद वकीलों ने भी वेबसाइट के कामकाज को लेकर परेशानी बताई और कहा कि पुरानी वेबसाइट बेहतर तरीके से काम करती थी।
रजिस्ट्रार के सामने जांचने पर भी जारी रही समस्या
बेंच ने अपने आदेश में दर्ज किया कि कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने 25/26 अगस्त को सभी जजों के व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश भेजकर बताया था कि वेबसाइट को अपडेट करने में आठ दिन लगेंगे। हालांकि, 15 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद वेबसाइट की स्थिति संतोषजनक नहीं हुई।
इसके बाद रजिस्ट्रार के.एस. कुशवाहा को कोर्ट की सहायता के लिए बुलाया गया। उनकी मौजूदगी में वेबसाइट और सिस्टम की जांच की गई, लेकिन बफरिंग और हैंग होने की समस्या तब भी बनी रही।
बेंच ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि IT स्टाफ की अक्षमता के कारण कोर्ट का न्यायिक समय बर्बाद हुआ है। इसी आधार पर चीफ जस्टिस से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया।
इसके साथ ही कोर्ट ने तकनीकी समस्याओं के कारणों का पता लगाने के लिए आंतरिक जांच और हाईकोर्ट के पूरे IT सिस्टम की स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया।

