बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की 2020 में हुई संदिग्ध मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय एजेंसी मामला दर्ज कर नए सिरे से पड़ताल शुरू करे, लेकिन जब तक पर्याप्त सबूत न मिलें तब तक किसी को भी आरोपी न बनाया जाए।
जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रणजीतसिंह राजा भोंसले की खंडपीठ ने मुंबई पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तुरंत सीबीआई के सुपुर्द करे। अदालत के आदेश के तहत, सीबीआई एक नई एफआईआर दर्ज करेगी और मृतका के पिता सतीश सालियान का विस्तृत बयान दर्ज करेगी, जिनकी याचिका पर अदालत ने यह हस्तक्षेप किया है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच पूरी होने पर कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है, तो सीबीआई को संबंधित अदालत के समक्ष नियमानुसार समरी (क्लोजर) रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने कहा कि पिता सतीश सालियान के पास उस क्लोजर रिपोर्ट को कानूनी रूप से चुनौती देने का पूरा अधिकार रहेगा।
बिना पुख्ता सबूत किसी को आरोपी न बनाने की सख्त हिदायत
जांच के दायरे को लेकर हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि जांच एजेंसी को केवल संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति को आरोपी की तरह नहीं देखना चाहिए। किसी को भी मामले में नामजद करने से पहले जांच के दौरान ठोस सामग्री और सबूतों का मिलना अनिवार्य है।
पिता की ओर से दायर याचिका में शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र जांच कराने की विशेष मांग की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठोस सबूतों और तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी भी व्यक्ति को सीधे तौर पर इस प्रकरण में नहीं घसीटा जा सकता।
पुलिस की शुरुआती जांच और राजनीतिक मिलीभगत के आरोप
सतीश सालियान ने अपने वकील नीलेश ओझा के जरिए पिछले साल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुंबई पुलिस के निष्कर्षों पर गंभीर सवाल उठाए थे। पिता का आरोप है कि जून 2020 में उनकी बेटी की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई थी।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि कुछ रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के मकसद से स्थानीय स्तर पर पूरे मामले को दबाने की राजनीतिक कोशिश की गई।
घटना की पृष्ठभूमि और पुलिस का पुराना निष्कर्ष
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में स्थित एक बहुमंजिला आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से नीचे गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना के तत्काल बाद स्थानीय पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी।
शुरुआती जांच और पड़ताल पूरी करने के बाद मुंबई पुलिस ने इस घटना को आत्महत्या करार दिया था। हालांकि, दिशा के परिवार ने पुलिस के इस निष्कर्ष को खारिज करते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

