कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन कर रही है और तमिलनाडु को निर्धारित 9,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष कर्नाटक सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने बताया कि राज्य ने सीडब्ल्यूएमए द्वारा 25 अगस्त को तय किए गए दैनिक कोटे से ज्यादा पानी प्रवाहित किया है। उन्होंने ताजा आंकड़ों का विवरण देते हुए कहा कि आदेश के पहले दिन 10,727 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इसके बाद 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक और सोमवार सुबह 8 बजे तक 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। दीवान ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि कर्नाटक ने हाल ही में कावेरी बेसिन के जिलों सहित अपने कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति घोषित की है।
तमिलनाडु ने उठाया बैकलॉग और कोटे में कटौती का मुद्दा
यह सुनवाई तमिलनाडु सरकार द्वारा तत्काल पानी छोड़े जाने के निर्देश की मांग को लेकर दायर याचिका पर हुई। तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि राज्य का दैनिक कोटा बिना किसी ठोस कारण के 12,000 क्यूसेक से घटाकर 9,000 क्यूसेक कर दिया गया। इससे पहले 12 अगस्त से 15 दिनों के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश जारी किया गया था। वैद्यनाथन ने कहा कि प्राधिकरण के समक्ष पानी के पुराने बकाया (बैकलॉग) का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उसे पूरा करने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया गया।
इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि कर्नाटक वर्तमान में निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ रहा है, और यदि तमिलनाडु को सीडब्ल्यूएमए के निर्णय पर आपत्ति है, तो उसे सीधे प्राधिकरण के आदेश को चुनौती देनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर तक टाली सुनवाई
अदालत को बताया गया कि कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) प्रत्येक 15 दिन में स्थिति की समीक्षा कर रही है और पक्षों की सुनवाई के बाद उचित निर्देश जारी कर रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय करते हुए दोनों राज्यों को अद्यतन आंकड़े और नए घटनाक्रम रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इससे पहले 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा था कि वह आनुपातिक जल बंटवारे से संबंधित अपनी मांग सीडब्ल्यूएमए के समक्ष उठाए। वहीं 17 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कर्नाटक को सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
विवाद की पृष्ठभूमि और तमिलनाडु का पक्ष
कम मानसूनी बारिश के कारण अपने हिस्से का पूरा पानी न मिलने का हवाला देते हुए जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। तमिलनाडु का कहना था कि सीडब्ल्यूआरसी द्वारा स्वीकृत मात्रा और कर्नाटक द्वारा छोड़ा गया वास्तविक पानी दोनों ही बेहद अपर्याप्त रहे हैं।
तमिलनाडु के अनुसार, सीडब्ल्यूआरसी ने 28 जुलाई की बैठक में 29 जुलाई से 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था, लेकिन 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडलू में केवल 158 से 550 क्यूसेक पानी ही प्राप्त हुआ।
तमिलनाडु सरकार की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, 3 अगस्त तक कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों—केआरएस, काबिनी, हारंगी और हेमावती—में कुल जल भंडारण 77.537 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) था। विज्ञप्ति में कहा गया कि केआरएस और काबिनी के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के बाद बिलिगुंडलू में तमिलनाडु का आनुपातिक हिस्सा 26.954 टीएमसी बनता है, जिसके मुकाबले सीडब्ल्यूएमए द्वारा स्वीकृत 4.536 टीएमसी का कोटा बेहद कम रहा।

