दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया: करणी सेना अध्यक्ष राज शेखावत पुलिस हिरासत में नहीं, आवाजाही के लिए स्वतंत्र

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत पुलिस की हिरासत में नहीं हैं और वे कहीं भी आने-जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके साथ ही अदालत ने उनकी कथित अवैध हिरासत के खिलाफ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका का निपटारा कर दिया।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में किसी तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि शेखावत को किसी भी कानूनी मामले में न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही हिरासत में लिया गया है।

भविष्य के प्रदर्शनों के लिए कानून का पालन जरूरी

अदालत ने शेखावत की आवाजाही की स्वतंत्रता को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि यदि वे भविष्य में किसी भी विरोध-प्रदर्शन में भाग लेते हैं, तो उन्हें कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। पुलिस ने कोर्ट को सूचित किया था कि शेखावत के जंतर-मंतर पहुंचकर सार्वजनिक प्रदर्शन करने की संभावना थी, जिसके मद्देनजर यह निर्देश दिया गया।

नजरबंदी के आरोप और जागरूकता अभियान का संदर्भ

शेखावत की ओर से दायर याचिका में दिल्ली के नेब सराय स्थित एक आवास से उन्हें मुक्त कराने की मांग की गई थी। उनके वकील का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन ने 24 अगस्त से उन्हें परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया।

शेखावत की कानूनी टीम के मुताबिक, वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) नियम, 2026 के संबंध में देशभर में एक जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के आश्वासन को दर्ज करते हुए इस याचिका पर कार्यवाही समाप्त कर दी।

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