मतदाता सूची से मां का नाम हटने पर बेटी को डोमिसाइल देने से इनकार नहीं कर सकते: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक छात्रा को एक सप्ताह के भीतर डोमिसाइल सर्टिफिकेट (निवास प्रमाण पत्र) जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी अभ्यर्थी को प्रमाण पत्र देने से नहीं रोका जा सकता कि उसकी मां का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

जस्टिस कृष्णा राव ने 27 अगस्त को यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता छात्रा ने पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (WBJEE) उत्तीर्ण की थी और वह नीट (NEET) में भी शामिल हुई थी। इंजीनियरिंग और मेडिकल दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उसे इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी।

काउंसलिंग के लिए जरूरी था निवास प्रमाण पत्र

याचिकाकर्ता के अनुसार, उसका जन्म और पालन-पोषण पश्चिम बंगाल में हुआ है और उसने 12वीं तक की पढ़ाई भी राज्य से ही पूरी की है। इससे पहले अगस्त 2024 में उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) द्वारा की गई जांच के बाद उसे कोलकाता के एक क्षेत्र का स्थायी निवासी बताते हुए डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया गया था।

जब छात्रा ने मौजूदा दाखिला काउंसलिंग के लिए दोबारा प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया, तो प्रशासन ने उस पर कोई फैसला नहीं लिया—न तो प्रमाण पत्र जारी किया और न ही आवेदन को खारिज किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि छात्रा की मां का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, इसलिए वह डोमिसाइल सर्टिफिकेट पाने की हकदार नहीं है।

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कोर्ट ने कहा- आवेदक की अपनी पहचान और पात्रता देखें

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों के पास प्रमाण पत्र रोकने का कोई वैध आधार नहीं है।

जस्टिस राव ने अपने आदेश में कहा कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करते समय प्रशासनिक अधिकारियों को उस विशिष्ट व्यक्ति की पात्रता और पहचान देखनी होती है जिसने इसके लिए आवेदन किया है। अदालत ने रेखांकित किया कि छात्रा का जन्म और शिक्षा राज्य में हुई है, उसे पूर्व में भी प्रमाण पत्र मिला था और उसका अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज है, जिसके आधार पर उसने पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान भी किया था।

अदालत ने संबंधित जिले के सब-डिवीजनल ऑफिसर (एसडीओ) या सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर छात्रा को डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया जाए, यदि वह अन्य सभी सामान्य पात्रता शर्तों को पूरा करती है।

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पासपोर्ट विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में भी दिया था निर्देश

मतदाता सूची से नाम कटने से जुड़े एक अन्य मामले में भी कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रशासनिक प्रक्रिया तेज करने का आदेश दिया था।

20 अगस्त को जस्टिस कृष्णा राव ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अपीलीय न्यायाधिकरण से अनुरोध किया था कि वह एक महिला की अपील का निपटारा आदेश प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर प्राथमिकता के आधार पर करे। उस मामले में महिला का नाम मतदाता सूची से हटने के कारण उसके बेटे का पासपोर्ट अटका हुआ था, जिससे वह बांग्लादेश में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं कर पा रहा था।

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