आने वाले डिजिटल पेमेंट को ‘Accept/Decline’ करने का विकल्प देने की मांग, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने RBI और NPCI को जारी किया नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को उस जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें बैंक खाताधारकों को आने वाले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट को खाते में जमा होने से पहले स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प देने की मांग की गई है।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अधिवक्ता अनुप्रिया अग्रवाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर 24 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद प्रतिवादी संख्या 2 और 3 को नोटिस जारी किया और मामले को आठ सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

याचिका में मौजूदा डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया गया है। इसके मुताबिक, भुगतान करने वाले व्यक्ति के पास ट्रांजैक्शन शुरू करने और उसे प्रमाणित करने का नियंत्रण होता है, लेकिन जिस व्यक्ति के खाते में पैसा भेजा जा रहा है, उसके पास आमतौर पर किसी विशेष पेमेंट को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प नहीं होता।

याचिका में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी गई रकम सीधे प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में पहुंच जाती है और इसके लिए उसकी पूर्व सहमति की जरूरत नहीं होती।

हर इनकमिंग पेमेंट के लिए ‘Accept/Decline’ विकल्प देने की मांग

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याचिकाकर्ता ने RBI को उचित दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश देने की मांग की है, ताकि किसी भी इनकमिंग इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के बैंक खाते में जमा होने से पहले खाताधारक को अनिवार्य रूप से उसे ‘Accept’ या ‘Decline’ करने का विकल्प मिल सके।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल ने कोर्ट के समक्ष कहा कि मौजूदा डिजिटल पेमेंट सिस्टम में भुगतान करने वाले व्यक्ति को ट्रांजैक्शन शुरू करने और उसे प्रमाणित करने की सुविधा मिलती है, जबकि प्राप्तकर्ता को किसी खास ट्रांजैक्शन के स्तर पर यह तय करने की सुविधा नहीं है कि वह उस रकम को लेना चाहता है या नहीं।

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याचिका के मुताबिक, इस असमानता पर ग्राहक सुरक्षा, वित्तीय स्वायत्तता, निजता और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के नजरिए से विचार किए जाने की जरूरत है।

याचिका में ऐसे मामलों का भी मुद्दा उठाया गया है, जहां कोई खाताधारक किसी विशेष व्यक्ति या स्रोत से भुगतान प्राप्त नहीं करना चाहता, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में रकम को अपने खाते में आने से रोकने का उसके पास कोई विकल्प नहीं है।

हाईकोर्ट ने RBI और NPCI को जारी किया नोटिस

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार की ओर से सीनियर काउंसिल एवं डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एस.बी. पांडेय पेश हुए, जिनकी सहायता अधिवक्ता अम्ब्रिश राय ने की। कोर्ट के आदेश में याचिकाकर्ता की ओर से राकेश कुमार अग्रवाल और सक्षम अग्रवाल के नाम भी अधिवक्ता के रूप में दर्ज हैं, जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से ए.एस.जी.आई. दर्ज है।

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याचिका में भारत सरकार को वित्त मंत्रालय के सचिव के माध्यम से, RBI और NPCI को प्रतिवादी बनाया गया है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। कोर्ट ने RBI और NPCI को नोटिस जारी करते हुए मामले को आठ सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

केस डिटेल्स

केस: अनुप्रिया अग्रवाल बनाम भारत संघ एवं अन्य
केस नंबर: जनहित याचिका (PIL) संख्या 805/2026
पीठ: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला
याचिकाकर्ता की ओर से: राकेश कुमार अग्रवाल, सक्षम अग्रवाल
केंद्र सरकार की ओर से: सीनियर काउंसिल एवं डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एस.बी. पांडेय, सहायक अधिवक्ता अम्बरीश राय
आदेश की तारीख: 24 अगस्त 2026

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