आरटीई दाखिले: इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार को निर्देश, 5 साल का स्कूल-वार ब्योरा तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य के सभी स्कूलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत हुए दाखिलों का स्कूल-वार विस्तृत आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से उन पात्र बच्चों की जानकारी भी देने को कहा है जिनके दाखिले के आवेदनों को निजी स्कूलों ने खारिज कर दिया या जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की।

अवैध फीस और स्क्रीनिंग शिकायतों पर मांगी रिपोर्ट

अदालत ने राज्य सरकार से उन शिकायतों का ब्योरा भी मांगा है जिनमें निजी स्कूलों पर अवैध रूप से कैपिटेशन फीस वसूलने या राज्य की शिक्षा नीति का उल्लंघन कर बच्चों के चयन के लिए अनधिकृत स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाने के आरोप लगे हैं। सरकार को हलफनामे में यह भी स्पष्ट करना होगा कि ऐसी शिकायतों पर अब तक क्या दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने सेंट जॉन्स स्कूल, बभनौती, पचवाल की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात आई कि राज्य से मान्यता प्राप्त कई निजी संस्थान आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने और अपनी तय फीस माफ करने में टालमटोल कर रहे हैं।

15 सितंबर तक हलफनामा दाखिल करने का समय

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मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को इस तिथि तक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस दिवाकर ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल इन आरोपों पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं कर रही है। यह आंकड़ा सिर्फ इसलिए मांगा गया है ताकि प्रदेश में आरटीई के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ बिना पूर्व सूचना और कानूनी प्रक्रिया के कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों को सहयोग के निर्देश

प्रदेश भर से आंकड़े जुटाने के लिए हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) और अन्य बोर्डों से संबद्ध निजी स्कूलों को स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करने का आदेश दिया है। इन स्कूलों को अपने क्षेत्र के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को वांछित डेटा समय पर उपलब्ध कराना होगा।

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आरटीई कानून के तहत संवैधानिक जवाबदेही

हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें स्पष्ट किया गया था कि यूपी में संचालित सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड के निजी स्कूल आरटीई अधिनियम, 2009 के प्रावधानों से बाहर नहीं हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत लागू यह कानून 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।

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