केरल के पथनामथिट्टा जिले में एक उपभोक्ता आयोग ने एक कैफे को आदेश दिया है कि वह अपनी दुकान से ग्रिल्ड चिकन ‘अल्फाहम’ खाने के बाद सालमोनेला संक्रमण का शिकार हुई महिला को 96,393 रुपये का भुगतान करे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पा की पीठ ने कैफे के मालिक और प्रबंधक को संयुक्त रूप से इस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
मुआवजे और चिकित्सा खर्च का पूरा विवरण
आयोग के आदेश के अनुसार, कैफे प्रबंधन को यह पूरा भुगतान 30 दिनों के भीतर करना होगा। यदि तय समय सीमा में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो कुल रकम पर 10 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता अदालत द्वारा तय की गई राशि में पीड़ित महिला के अस्पताल के इलाज का खर्च 36,393 रुपये, शारीरिक व मानसिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में 10,000 रुपये शामिल हैं।
खराब स्वाद की शिकायत को कैफे प्रबंधन ने किया नजरअंदाज
शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, वह और उसकी बहन 21 अक्टूबर 2025 को संबंधित कैफे में अल्फाहम खाने गई थीं। खाना खाते समय उन्हें उसका स्वाद अजीब लगा, जिसकी जानकारी उन्होंने तुरंत कैफे प्रबंधन को दी। हालांकि, कैफे कर्मियों ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया और शिकायत स्वीकार नहीं की।
खाना खाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे पेट में तेज दर्द, उल्टी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हुई। शुरुआती डॉक्टरी परामर्श के बाद स्थिति गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
अस्पताल की रिपोर्ट और सालमोनेला संक्रमण की पुष्टि
अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय जारी डिस्चार्ज समरी में महिला को सालमोनेला संक्रमण होने की पुष्टि की गई। सालमोनेला एक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जो आंतों को प्रभावित करती है। यह संक्रमण आमतौर पर दूषित या अधपके भोजन का सेवन करने से होता है, जिसके मुख्य लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी, पेट दर्द और दस्त शामिल हैं।
महिला ने बताया कि इलाज पर 36,393 रुपये खर्च होने के बाद उसके बेटे ने कैफे प्रबंधन से चिकित्सा खर्च की भरपाई करने का अनुरोध किया था। आरोप है कि कैफे के प्रतिनिधियों ने उसकी बात का मजाक उड़ाया और भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया।
कैफे मालिक की दलील खारिज, 30 दिनों में भुगतान का निर्देश
आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान कैफे के मालिक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि परोसा गया भोजन उच्च गुणवत्ता का था। उसने अपनी दलील में कहा कि उस दिन 100 से अधिक अन्य ग्राहकों ने भी वही चिकन डिश खाई थी और किसी अन्य व्यक्ति ने बीमारी की शिकायत नहीं की थी।
हालांकि, आयोग ने कैफे मालिक के इस तर्क को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि बचाव पक्ष अस्पताल की आधिकारिक डिस्चार्ज समरी में दर्ज निष्कर्षों को गलत साबित करने में असफल रहा। आयोग ने स्पष्ट माना कि महिला का इलाज कैफे में भोजन करने के तुरंत बाद हुआ था, जिसके लिए कैफे प्रबंधन ही पूरी तरह जिम्मेदार है।

