मकोका (MCOCA) के तहत दर्ज मामले में जमानत की मांग कर रहे आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट विचार करने के लिए सहमत हो गया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बाल्यान ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट के अवलोकन और आपराधिक सांठगांठ के आरोप
इससे पहले 3 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक को राहत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि बाल्यान और गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच हुई बातचीत से दोनों के बीच एक सक्रिय आपराधिक सांठगांठ का संकेत मिलता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पूर्व विधायक सांगवान के गिरोह के लिए एक मददगार की भूमिका निभा रहे थे।
सुनवाई के दौरान बाल्यान की ओर से तर्क दिया गया था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और राजनीतिक द्वेष के तहत उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने खुद को गिरोह का पीड़ित बताते हुए दावा किया था कि उन्होंने पूर्व में सांगवान के खिलाफ पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि राजनीतिक बदले की भावना का दावा पूरी तरह से निराधार है। अदालत का कहना था कि केवल पुरानी शिकायतों के आधार पर जांच एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतें वास्तविक थीं या फिर बचाव की कोई चतुर रणनीति, इसका फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही होगा।
मामले का घटनाक्रम और कानूनी पृष्ठभूमि
पूर्व विधायक को 4 दिसंबर 2024 को मकोका प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था। खास बात यह है कि उसी दिन एक अन्य रंगदारी मामले में निचली अदालत से उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद मकोका मामले में 27 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कपिल सांगवान का गिरोह दिल्ली के विभिन्न इलाकों में संगठित अपराध और अवैध संपत्ति अर्जित करने की गतिविधियों में शामिल रहा है, और इस नेटवर्क के खिलाफ 16 से 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

