बांद्रा फुटबॉल मैदान को प्रदर्शनी केंद्र बनाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, मौखिक आश्वासन तोड़ने पर बीएमसी को फटकार

बांद्रा रेक्लेमेशन स्थित नेविले डीसूजा फुटबॉल मैदान का आरक्षण बदलने के फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत में यथास्थिति बनाए रखने का मौखिक आश्वासन देने के बावजूद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की जनरल बॉडी द्वारा मैदान को प्रदर्शनी केंद्र में बदलने का प्रस्ताव पास करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने बीएमसी को इस फैसले के तहत आगे कोई भी कदम न उठाने का निर्देश देते हुए हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

अदालत के आश्वासन का उल्लंघन

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब अधिकारी अदालत को दिए गए मौखिक आश्वासन के विपरीत निर्णय लेते हैं, तो इससे कानून की गरिमा पर सवाल उठता है। इससे पहले 10 अगस्त को हुई सुनवाई में बीएमसी ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था और पीठ को मौखिक रूप से आश्वस्त किया था कि याचिका लंबित रहने के दौरान कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। इसके बावजूद मंगलवार को बीएमसी जनरल बॉडी ने भू-उपयोग बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

जब गुरुवार को हाईकोर्ट ने इस फैसले के संबंध में सवाल किया, तो बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गिरीश गोडबोले ने सफाई दी कि नगर आयुक्त और संबंधित नागरिक अधिकारियों को अदालत में दिए गए मौखिक आश्वासन की जानकारी नहीं थी। पीठ ने इस रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि अधिकारियों का ऐसा आचरण अपने आप में एक गंभीर समस्या है।

खुले मैदानों की घटती संख्या पर चिंता

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सुनवाई के दौरान पीठ ने शहरों में खेल के मैदानों की कमी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने टिप्पणी की कि शहरों में कुछ जगहों को खुला रखना ही होगा, अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी आउटडोर खेल क्या होते हैं, यह पूरी तरह भूल जाएगी। पीठ ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह मैदानों को दूसरे कार्यों के लिए आवंटित किया जाएगा, तो लोग फुटबॉल कहां खेलेंगे।

बिना अध्ययन के लिया गया फैसला

मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन ने बीएमसी के इस प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में आवास एजेंसी म्हाडा (MHADA) के नवंबर 2025 के पत्र और बीएमसी की सुधार समिति की मई 2026 की उस सिफारिश को चुनौती दी गई है, जिसमें महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम के तहत 8,450 वर्ग मीटर के इस मैदान का आरक्षण बदलने का सुझाव दिया गया था।

एसोसिएशन का तर्क है कि नगर निगम प्रशासन ने यह प्रस्ताव तैयार करने से पहले न तो कोई खेल प्रभाव आकलन कराया, न ही उपयोगकर्ता सर्वेक्षण और न ही कोई व्यवहार्यता अध्ययन किया।

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मैदान का महत्व और सुविधाएं

भारत के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी नेविले डीसूजा के नाम पर बने इस मैदान में फीफा मानकों के अनुरूप आर्टिफिशियल टर्फ लगा हुआ है। इसमें लगभग 5,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है और यहां हर सत्र में 900 से अधिक आधिकारिक मुकाबले खेले जाते हैं।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है और तब तक बीएमसी को किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई से दूर रहने का आदेश दिया है।

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