उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के ज़िलाधिकारी को तिब्बती मूल के एक नागरिक के भारतीय नागरिकता आवेदन और उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की समीक्षा करने तथा कानून के तहत छह महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने तेनज़िन थिनले द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, देहरादून ज़िलाधिकारी कार्यालय की ओर से उनके आवेदन को केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकरण के पास नहीं भेजा गया, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। लंबे समय तक मामला लंबित रहने के बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
आवेदन अटकाने पर हाईकोर्ट पहुंचे थे तेनज़िन थिनले
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि तेनज़िन थिनले का जन्म 15 सितंबर 1992 को हुआ था और वे 12 मई 2013 को तिब्बत से भारत आए थे। याचिका में थिनले ने मांग की थी कि ज़िला प्रशासन को उनका मामला केंद्रीय प्राधिकरण को प्रेषित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, उन्होंने इस प्रकरण से संबंधित सभी प्रशासनिक रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का भी अनुरोध किया था।
छह सप्ताह में केंद्र सरकार को फाइल भेजने का निर्देश
हाईकोर्ट ने देहरादून डीएम को निर्देश दिया कि वे नागरिकता आवेदन और साथ लगाए गए सभी कागजातों की गहनता से जांच करें। अदालत ने साफ किया कि यदि जांच के दौरान आवेदन सभी निर्धारित कानूनी मानदंडों के अनुरूप पाया जाता है, तो आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से छह सप्ताह के भीतर पूरी फाइल केंद्र सरकार के संबंधित प्राधिकरण को भेजी जानी चाहिए।

