केरल हाईकोर्ट का आदेश: छह हफ़्ते के भीतर भरी जाएं वक्फ बोर्ड की सभी रिक्तियां

केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड में खाली पड़े सभी पदों को भरने के लिए छह हफ़्ते की समयसीमा तय की है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वीएम की पीठ ने बुधवार को कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया। याचिकाओं में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शोण जॉर्ज की अर्जी भी शामिल है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कानून के तहत अनिवार्य दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण बोर्ड का वर्तमान कामकाज गैर-कानूनी है।

गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य का पक्ष रखते हुए एडवोकेट जनरल जाजू बाबू ने अदालत को बताया कि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम 1995 की धारा 14 के तहत वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों की नियुक्ति का विषय वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।

विभिन्न मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए जनसंख्या का निर्धारण

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याचिकाओं में शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी और पिछड़े वर्ग के मुस्लिम समुदायों से सदस्य न चुने जाने के दावे भी शामिल हैं। इस पर राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि इन विशिष्ट समुदायों को प्रतिनिधित्व केवल तभी दिया जा सकता है जब पूरे राज्य में उनकी आबादी के सटीक आंकड़े उपलब्ध हों।

सरकार ने अदालत को सूचित किया कि संबंधित समुदायों की संख्या का विस्तृत आकलन करने के लिए राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को निर्देश दे दिए गए हैं।

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बोर्ड के पुनर्गठन पर हाईकोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल इस पहलू का मूल्यांकन नहीं कर रहा है कि संशोधित वक्फ कानून के तहत बोर्ड का पूरा पुनर्गठन आवश्यक है या नहीं। हालांकि, पीठ ने राज्य अधिकारियों को वैधानिक निकाय के गठन के संबंध में जरूरी फैसले लेने और बाकी बची रिक्तियों को शीघ्रता से भरने का आदेश दिया है।

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