गुजरात हाईकोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के पूर्व कैश ऑफिसर की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी पर एटीएम और बैंक के आंतरिक सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर 1.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एच डी सुथार ने इस अपराध को व्यक्तिगत लाभ के लिए सोच-समझकर रचा गया गंभीर आर्थिक अपराध बताया। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराधों का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, इसलिए जमानत के मामले में कड़ी न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
जांच में सामने आई धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी बंगमोय चक्रवर्ती नर्मदा जिले के राजपीपला स्थित एसबीआई शाखा के करेंसी चेस्ट से नकदी निकालने और उसे स्थानीय एटीएम व कैश डिपॉजिट मशीनों में डालने के लिए जिम्मेदार था। आरोप है कि उसने अपने प्रशासनिक क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर एटीएम की स्क्रीन पर दिखने वाली राशि में बदलाव किया। इस वजह से मशीनों में अनिवार्य न्यूनतम शेष राशि दिखती रही, जबकि उसने नकदी निकाल ली।
इस कमी को छिपाने के लिए चक्रवर्ती ने बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में फर्जी कैश डिपॉजिट की प्रविष्टियां दर्ज कीं। जांच में चार प्रमुख एटीएम से कुल 1.93 करोड़ रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है। इनमें राजपीपला स्टेशन रोड स्थित एटीएम से 39.98 लाख रुपये, पोइचा स्थित स्वामीनारायण गुरुकुल एटीएम से 39.92 लाख रुपये, एटीएम नंबर 465624 से 62 लाख रुपये और संतोष चौकड़ी स्थित एटीएम नंबर 465625 से 51.64 लाख रुपये की हेराफेरी शामिल है।
डिजिटल साक्ष्य और पैसों का लेनदेन
जांच एजेंसियों ने गायब पैसों का सुराग चक्रवर्ती और उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड में रहने वाले उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों तक जुटाया है। यह राशि बाद में यूपीआई, आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए आईसीआईसीआई बैंक के खातों में स्थानांतरित की गई। पुलिस फिलहाल इस मामले में कुल 2.34 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही है।
अदालत के समक्ष पेश किए गए डिजिटल सबूतों में सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं, जो संबंधित समय पर चक्रवर्ती की एटीएम पर उपस्थिति दर्शाते हैं। इसके अलावा मोबाइल लोकेशन डेटा भी उसी स्थान की पुष्टि करता है। चक्रवर्ती का तबादला 17 अक्टूबर 2025 को छोटा उदेपुर जिले की नसवाड़ी शाखा में कर दिया गया था, लेकिन उसकी कैश ऑफिसर आईडी और पासवर्ड 6 नवंबर तक सक्रिय रहे। इस दौरान 28 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 3 नवंबर को बैंक रिकॉर्ड में अनियमित प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें
राजपीपला पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चक्रवर्ती को 28 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह तब से हिरासत में है। राज्य के वकीलों ने अदालत को बताया कि घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था और गुजरात पुलिस द्वारा पकड़े जाने से पहले उसने झारखंड की स्थानीय पुलिस की मदद ली थी।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चक्रवर्ती को झूठा फंसाया गया है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और आरोप पत्र दाखिल होने के साथ जांच पूरी हो चुकी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन तर्कों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि सीधे डिजिटल सबूतों और भारी वित्तीय नुकसान की गंभीरता को देखते हुए उसे हिरासत में रखना जरूरी है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां और सुप्रीम कोर्ट के फैसले
जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, जिनमें वाईएस जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ सीबीआई मामले का निर्णय भी शामिल है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के होते हैं और इनमें जमानत अर्जी पर विचार करते समय सख्त दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता से समाज या दूसरों के अधिकारों को खतरा उत्पन्न होता है, तो स्वतंत्रता असीमित नहीं हो सकती। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यह मामला केवल सह-आरोपियों के बयानों या संदेह पर आधारित नहीं है, बल्कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और वित्तीय लेनदेन के मजबूत सबूतों पर टिका है। सबूतों के इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय स्वरूप को देखते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

