सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फसलों के नुकसान की वजह बताकर राज्य हाथियों के पारंपरिक रास्तों और गलियारों में रुकावट पैदा नहीं कर सकते। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह देशभर में एलीफेंट कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे कराए और इन रास्तों से बाधाएं हटाने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।
मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने हाथियों के रास्तों में लगाई जा रही रुकावटों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। हाथियों के झुंड लंबी दूरी तय करते हैं, इसलिए फसलों के नुकसान का हवाला देकर उनके मार्ग में अवरोध खड़े करने की अनुमति किसी राज्य को नहीं दी जा सकती।
अदालत ने रेखांकित किया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्यों के बीच से गुजरने वाले हाथी गलियारों को बाधारहित बनाए रखने के लिए अनिवार्य दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद स्थानीय कारणों से कई स्थानों पर इन रास्तों को बंद, संकरा या बाधित कर दिया गया है।
हिंसक उपायों और दीवार निर्माण पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पश्चिम बंगाल में इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते टकराव का मुद्दा उठाया। अदालत को बताया गया कि वहां हाथियों को डराने और खदेड़ने के लिए ‘हुल्ला पार्टियां’ गठित की जाती हैं, जो जलती हुई मशालों और आग के गोलों का प्रयोग करती हैं।
मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि नेपाल और उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों से होते हुए हाथियों के झुंड ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़ते हैं। हालांकि, ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने हाथियों को अपने राज्यों में प्रवेश करने से रोकने के लिए सीमाओं पर दीवारें बना ली हैं।
हिंसक कार्रवाइयों पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अदालत ने हाथियों के खिलाफ बंदूकों और अन्य हिंसक उपायों के इस्तेमाल पर गंभीर रुख अपनाते हुए इस पर अलग से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञ निकाय द्वारा बनाए गए नियमों का कौन से राज्य पालन नहीं कर रहे हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि साल 2023 में एक निरीक्षण किया गया था और उसकी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार नए सिरे से सर्वेक्षण करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अदालत ने केंद्र को व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।

