अमरावती में जमीन पूलिंग योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और कैबिनेट मंत्री पी. नारायण को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक अल्ला रामकृष्ण रेड्डी की याचिका को निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि इस याचिका के नतीजे का असर अन्य लंबित मामलों पर नहीं पड़ेगा और उनकी सुनवाई उनके अपने कानूनी गुण-दोष के आधार पर की जाएगी।
राजनीतिक रंजिश का हथियार न बने अदालत: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता साधने के लिए नहीं होना चाहिए। चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि यह आपराधिक कार्रवाई एक राजनीतिक विरोधी की शिकायत पर शुरू की गई थी और इसमें कोई भी प्रभावित किसान पक्षकार बनकर सामने नहीं आया है। पीठ ने यह भी कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका प्रतिबद्ध है, लेकिन राजनीतिक लड़ाइयों को अदालत परिसर में नहीं लाया जाना चाहिए।
मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दलील दी थी कि 2016 की इस योजना में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है, जिससे लगभग 25,000 से अधिक किसानों की 30,000 एकड़ भूमि प्रभावित हुई। हालांकि, अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि किसी भी किसान ने सीधे तौर पर इस याचिका को चुनौती नहीं दी है।
यह कानूनी विवाद अल्ला रामकृष्ण रेड्डी द्वारा विधायक रहते हुए दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2016 के सरकारी आदेश के तहत लागू की गई लैंड पूलिंग योजना में भारी धांधली की गई है। इसके आधार पर अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने 12 मार्च 2021 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। सीआईडी ने जांच के बाद चंद्रबाबू नायडू, पी. नारायण और अन्य को आरोपी बनाते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), असाइंड लैंड्स एक्ट और एससी/एसटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद नायडू और नारायण ने हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां कोर्ट ने पहले कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई और बाद में 15 जुलाई को मामले को खारिज कर दिया था।
क्या था अमरावती लैंड पूलिंग मामला
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य की नई राजधानी अमरावती के निर्माण के लिए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण के विकल्प के रूप में स्वैच्छिक लैंड पूलिंग नीति शुरू की थी। इसका उद्देश्य किसानों से सहमति के आधार पर कृषि भूमि लेकर उन्हें विकसित आवासीय और व्यावसायिक भूखंड वापस करना था।
इस नीति के तहत, प्रति एकड़ कृषि भूमि समर्पित करने पर किसानों को 1,000 वर्ग गज आवासीय और 250 वर्ग गज व्यावसायिक विकसित भूमि देने का प्रावधान था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमरावती राजधानी परियोजना के लिए 25 गांवों के कुल 28,181 भूस्वामियों ने अपनी 35,215 एकड़ निजी कृषि भूमि दी थी।

