सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को CJI सूर्यकांत के खिलाफ विरोध से जुड़े मामले में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी करते हुए यह भी साफ किया कि इस मामले में छात्रों को किसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने यह मामला मेंशन किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और अन्य लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों तथा फैकल्टी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।
BCI ने कोर्ट को बताया कि NALSAR छात्रों से जुड़ा सर्कुलर वापस लिया जा चुका है। विरोध को लेकर शुरू की गई जांच भी वापस ले ली गई है। BCI ने नोटिस स्वीकार कर लिया है और कोर्ट ने उसे जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
सर्कुलर और जांच वापस लिए जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं का संबंधित पत्रों में जिक्र है, उन्हें लेकर NALSAR के छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
NALSAR के 2026 बैच को लेकर BCI ने की थी कार्रवाई
विवाद NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों द्वारा CJI सूर्यकांत के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद शुरू हुआ था।
BCI ने इस मामले में कदम उठाते हुए बैच के छात्रों को एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट की अनुमति नहीं देने का फैसला किया था। विरोध से जुड़े घटनाक्रम को लेकर जांच भी शुरू की गई थी। हालांकि, बाद में BCI ने इस कार्रवाई और जांच दोनों को वापस ले लिया।
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार जारी रखते हुए BCI को नोटिस जारी किया और छात्रों को अंतरिम सुरक्षा दी।
BCI के दखल पर CJI सूर्यकांत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों के मामले में BCI के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला मूल रूप से छात्रों और उनके बीच संवाद से जुड़ा था और इसमें बार काउंसिल के दखल की जरूरत नहीं थी।
अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए CJI ने कहा कि वह खुद छात्र गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों की बात गलत भी मान ली जाए, तब भी इससे उनका विरोध करने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।
सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने भी BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने बेंच के सामने कहा कि किसी यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे घटनाक्रम में BCI के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं था।
छात्रों को एनरोलमेंट करने और सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़ने की सलाह
CJI सूर्यकांत ने यह भी संकेत दिया कि इस विवाद का असर छात्रों के कानूनी पेशे में प्रवेश पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कम उम्र में किसी व्यक्ति की ओर से गलत बात कह दिए जाने से उसका विरोध करने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
CJI ने NALSAR के छात्रों को एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट कराने और सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़ने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को लीगल एड के मामलों के लिए पैनल में शामिल किया जा सकता है।

