इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अफजल अंसारी को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश शस्त्र लाइसेंस में अनियमितताओं और सरकारी रिकॉर्ड गायब होने से जुड़ी तीन आपराधिक प्राथमिकियों के सिलसिले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया है।
तीन मामलों को एक साथ किया संबद्ध
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने अफजल अंसारी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के वकील को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर प्रदान किया है। इसके साथ ही अदालत ने इन तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई करने का निर्देश देते हुए अगली तिथि तीन सप्ताह बाद की तय की है।
दर्ज एफआईआर और आरोपों का ब्योरा
यह विवाद गाजीपुर के कोतवाली थाने में दर्ज तीन अलग-अलग मामलों से जुड़ा है। पुलिस का कहना है कि जांच में शस्त्र सौदों में प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां और सांसद के लाइसेंस पर खरीदी गई एक राइफल के गायब होने की बात सामने आई थी। इन मामलों में अफजल अंसारी के अलावा तत्कालीन शस्त्र लिपिक गौरीशंकर लाल और शस्त्र लिपिक सुग्रीव तिवारी को भी नामजद किया गया है। सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक षड्यंत्र और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा कायम है। पुलिस का दावा है कि विभागीय लिपिकों की मिलीभगत से सरकारी रिकॉर्ड जानबूझकर हटाए गए थे।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलील
अपनी याचिकाओं में दर्ज प्राथमिकियों को चुनौती देते हुए अफजल अंसारी ने कहा कि जिन विभागीय दस्तावेजों के गायब होने की बात कही जा रही है, वे वर्ष 1983 से 1987 के दौरान के हैं। उन्होंने अदालत का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि दशकों पुराने इस मामले में पुलिस ने जुलाई 2026 में जाकर प्राथमिकी दर्ज की है।

