एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप 2025 में भारत के लिए एकमात्र पदक जीतने वाले 25 वर्षीय सर्फर रमेश बुदिहाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बुदिहाल ने जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले एशियाई खेलों की मुख्य भारतीय सर्फिंग टीम से खुद को बाहर रखकर केवल रिजर्व खिलाड़ी बनाए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा बुदिहाल को मुख्य दल में शामिल न करने पर खेल अधिकारियों से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है।
पोर्टल पर प्रविष्टि का तर्क खारिज
सुनवाई के दौरान भारतीय ओलंपिक संघ ने तर्क दिया कि चयनित एथलीटों की सूची एशियाई ओलंपिक परिषद के पोर्टल पर पहले ही अपलोड की जा चुकी है और अब इसमें बदलाव संभव नहीं है।
न्यायमूर्ति गोविंदराज ने इस प्रशासनिक दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि गलत नाम दर्ज किया गया है तो उसे हटाया जाएगा, भले ही इसके कारण प्रतियोगिता में भारत का कोई प्रतिनिधि न रहे। पीठ ने खेल निकायों को चेतावनी देते हुए कहा कि खेल महासंघों और संघों का अस्तित्व केवल खिलाड़ियों की वजह से है, खिलाड़ियों के बिना इन संस्थाओं का कोई वजूद नहीं है।
बुदिहाल का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता मनमोहन पी. ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल पिछली एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप में देश के एकमात्र पदक विजेता हैं, लेकिन इसके बावजूद फेडरेशन ने उन्हें मुख्य चयन से बाहर रखने का कोई कारण नहीं बताया। याचिका में 2026 एशियाई खेलों के लिए भेजी गई सूची को वापस लेने और एक स्वतंत्र चयन समिति गठित करने की मांग की गई है।
अंदरूनी गतिरोध और कार्यकारी परिषद का फैसला
अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार, यह विवाद सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के भीतर कई हफ्तों तक चले प्रशासनिक गतिरोध का परिणाम है। महासंघ द्वारा 3 जून को पहली प्रतिभागी सूची जारी किए जाने के बाद बुदिहाल ने फेडरेशन की अपीलीय समिति के समक्ष चुनौती दी थी।
अपीलीय समिति ने बुदिहाल की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए फेडरेशन को एक समर्पित चयन समिति बनाने का निर्देश दिया था। इस समिति को 1 जनवरी 2025 के बाद के प्रदर्शनों और एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप के परिणामों को उचित प्राथमिकता देते हुए वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने को कहा गया था।
हालांकि, जब 20 और 21 जून को महिला और पुरुष वर्गों के पुनर्मूल्यांकन के लिए चयन समिति की बैठक हुई, तो सदस्य मूल्यांकन पद्धति पर एकमत नहीं हो सके। सर्वसम्मति न बनने पर व्यक्तिगत आकलन के जरिए मतदान कराया गया, जिसमें रमेश बुदिहाल और साथी सर्फर शिवराज बाबू को बराबर वोट मिले।
इसके बाद 23 जून को फेडरेशन की कार्यकारी परिषद ने स्वयं चयन अधिकार अपने हाथ में ले लिए और शिवराज बाबू को मुख्य खिलाड़ी तथा बुदिहाल को पहला रिजर्व घोषित कर दिया। कार्यकारी परिषद ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए तर्क दिया कि चयन नीति में टाई-ब्रेकर का प्रावधान नहीं था और भारतीय ओलंपिक संघ की समय-सीमा से पहले ‘सर्फ-ऑफ’ आयोजित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था।
बुदिहाल ने अपनी याचिका में कहा है कि कार्यकारी परिषद के पास खिलाड़ियों के चयन का विधिक अधिकार नहीं है और यह शक्ति केवल औपचारिक चयन समिति के पास निहित है। याचिका में महासंघ के इस कदम को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है।

