कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दर्ज चार एफआईआर को रद्द करने की मांग की है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि याचिका पर अदालत की तय प्रक्रिया और केस के सीरियल नंबर के हिसाब से ही सुनवाई होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कई समान मामले पहले से ही सूचीबद्ध हैं, इसलिए सुमित रॉय की याचिका को वरीयता देने या लिस्ट में ऊपर लाने का कोई आधार नहीं बनता।
सुमित रॉय के वकील त्रिदीप पैस ने कोर्ट से 10 अगस्त को मामले पर त्वरित सुनवाई तय करने का अनुरोध किया था। इस याचिका में राज्य में दर्ज चार एफआईआर को चुनौती दी गई है और कोर्ट से प्राथमिकियों को रद्द करने के साथ-साथ पुलिस की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत देने की गुहार लगाई गई है। वकील ने पीठ को यह भी जानकारी दी कि ये चार मामले उन दो अन्य आपराधिक मामलों से पूरी तरह अलग हैं, जिनमें रॉय को पहले ही अदालती संरक्षण मिल चुका है।
अन्य मामलों में मिली कानूनी राहत का ब्योरा
हाईकोर्ट का यह रुख सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुमित रॉय को दी गई उस राहत के बाद आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज सरकारी जमीन धोखाधड़ी और जमीन कब्जे के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद रॉय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया।
इसके अलावा, नौकरी के बदले नकद (कैश फॉर जॉब्स) घोटाले से जुड़े एक अन्य अलग मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट सुमित रॉय को पहले ही अग्रिम जमानत दे चुका है।

