देश की सड़कों पर दौड़ रहे करोड़ों बिना बीमा वाले वाहनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत वैध थर्ड-पार्टी बीमा के बिना पेट्रोल पंपों पर वाहनों को ईंधन देने से इनकार कर दिया जाएगा। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश एक मोटर दुर्घटना दावे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को दिया।
नए वाहनों के लिए बढ़ा थर्ड-पार्टी बीमा का दायरा
सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहनों की खरीद पर अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि में एक-एक साल की बढ़ोतरी कर दी है। नए आदेश के अनुसार, अब नई कारों के लिए चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा। अदालत ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) को इस संबंध में तुरंत निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। इससे पहले 2018 के फैसले में कारों के लिए तीन साल और दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल की अवधि तय की गई थी। हालांकि आईआरडीए और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) ने इस अवधि को न बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के दौड़ रहे
अदालत ने वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल पंजीकृत 30.48 करोड़ वाहनों में से लगभग 56 प्रतिशत यानी 16.54 करोड़ वाहन बिना किसी थर्ड-पार्टी बीमा के चल रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत बीमा को अनिवार्य बनाने का मूल उद्देश्य यह है कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को त्वरित मुआवजा मिले और उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई में न उलझना पड़े। बीमा न होने से पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर राहत नहीं मिल पाती, जिससे विशेष रूप से मृत्यु या स्थायी विकलांगता के मामलों में उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
एएनपीआर कैमरों से चालान और पुलिस को मिलेंगे हैंडहेल्ड उपकरण
पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने की योजना को लागू करने के लिए स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों की मदद ली जाएगी। आईआरडीए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) तथा पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर इसे अंतिम रूप देंगे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस योजना पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसके अतिरिक्त, चुनिंदा राज्यों में एएनपीआर कैमरों को ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल और बीमा सूचना ब्यूरो के डेटा से जोड़कर स्वचालित ई-चालान जारी किए जाएंगे।
जमीनी स्तर पर जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या विशेष मोबाइल ऐप मुहैया कराने का निर्देश दिया है। इसके जरिए पुलिस अधिकारी वास्तविक समय (रियल-टाइम) में वाहनों के बीमा की स्थिति जांच सकेंगे और नियम तोड़ने वालों पर मौके पर ही जुर्माना लगा सकेंगे।
टोल प्लाजा और बीमा विकल्पों पर अन्य निर्देश
राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुचारू करने और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को खत्म करने के लिए अदालत ने कुछ गलियारों पर वाहनों की स्वचालित पहचान प्रणाली से जुड़ा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, आईआरडीए को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह निजी वाहन मालिकों को वैधानिक न्यूनतम बीमा कवर के साथ-साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, ओन-डैमेज (स्वयं के नुकसान का बीमा) और अन्य ऐड-ऑन विकल्पों के चयन की सुविधा प्रदान करे।

