माणिकराव कोकाटे मामला: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, छह महीने में याचिका का निपटारा करे बॉम्बे हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता माणिकराव कोकाटे को बड़ी राहत देते हुए हाउसिंग घोटाले से जुड़े मामले में उनकी सजा पर लगी रोक की अवधि बढ़ा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह कोकाटे की पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) पर अगले छह महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की पीठ ने यह आदेश जारी किया। इससे पहले पिछले साल 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कोकाटे की सजा पर अंतरिम रोक लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस फैसले से नासिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से विधायक कोकाटे की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा और वे अयोग्य घोषित नहीं होंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख और कानूनी प्रक्रिया

यह मामला 1989 से 1992 के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए लागू की गई एक सरकारी आवास योजना में धोखाधड़ी से जुड़ा है। योजना के तहत 30,000 रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को सस्ते मकान दिए जाने थे। आरोप है कि कोकाटे और उनके भाई ने फर्जी हलफनामा जमा कर इस योजना का लाभ उठाया।

फरवरी 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कोकाटे और उनके भाई को धोखाधड़ी व जालसाजी का दोषी मानते हुए दो-दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ की गई अपील को 16 दिसंबर 2025 को नासिक सत्र अदालत ने खारिज कर दिया था।

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इसके बाद 19 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोकाटे की दो साल की जेल की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी, लेकिन दोषसिद्धि (सजा) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जो EWS कोटे का फ्लैट हासिल करने के लिए झूठे शपथ पत्र जमा करने में उनकी संलिप्तता दर्शाते हैं। हालांकि, कम अवधि की सजा और ट्रायल के दौरान जमानत पर रहने के आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें जेल भेजने के बजाय जमानत देना उचित समझा। कोकाटे ने हाईकोर्ट में अपनी सजा को गैर-कानूनी और मनमाना बताया है।

समृद्ध किसान होने के सबूत और राजनीतिक घटनाक्रम

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नासिक सत्र अदालत ने फैसले में वित्तीय दस्तावेजों, रबी फसल व अंगूर की खेती के लिए लिए गए बैंक ऋण और कोपरगांव सहकारी शक्कर कारखाना के रिकॉर्ड का हवाला दिया था। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि कोकाटे एक समृद्ध किसान थे और उनकी आय EWS सीमा से कहीं अधिक थी, जिससे उनका आवेदन धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

सत्र अदालत द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बीच 17 दिसंबर को कोकाटे से उनके मंत्री पद के विभाग वापस ले लिए गए। इसके अगले दिन, 18 दिसंबर को उन्होंने कैबिनेट से अपना इस्तीफा सौंप दिया। उसी रात देर गए नासिक पुलिस की एक टीम उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट की तामील कराने के लिए मुंबई के बांद्रा स्थित आवास पर पहुंची थी।

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