आतंकवाद, नशे और संगठित अपराध के मामलों में जल्द न्याय के लिए दिल्ली में विशेष अदालतें शुरू, CJI सूर्यकांत ने किया उद्घाटन

देश की राजधानी दिल्ली में आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर मामलों की तेज सुनवाई के लिए विशेष समर्पित अदालतों की शुरुआत की गई है। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में इन ‘विशेष अनन्य अदालतों’ (स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट) का औपचारिक उद्घाटन किया। यह नई न्यायिक प्रणाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और मकोका (MCOCA) के तहत दर्ज मामलों का विशेष रूप से निपटारा करेगी।

जटिल मुकदमों के लिए समर्पित न्यायिक व्यवस्था

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय तक वास्तविक पहुंच का मतलब केवल अदालत तक पहुंचना नहीं है, बल्कि सक्षम पीठ द्वारा तय समय-सीमा के भीतर न्याय मिलना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनआईए एक्ट, यूएपीए, एनडीपीएस और मकोका के तहत आने वाले मामलों की प्रकृति बेहद जटिल होती है। इन मुकदमों में कई राज्यों का क्षेत्राधिकार, विशाल दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिकॉर्ड, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू और कई सह-आरोपी शामिल होते हैं, जिसके लिए निरंतर अदालती ध्यान और विशेष कानूनी विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

न्यायिक देरी पर चिंता और समयबद्ध सुनवाई

मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने पर चिंता जताते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि जब जटिल मुकदमों में बार-बार तारीखें पड़ती हैं, तो सुनवाई की गति टूट जाती है और न्याय की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसी देरी से पीड़ितों के लिए अनिश्चितता बनी रहती है, जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के फैसले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और समय बीतने के साथ महत्वपूर्ण सबूत भी कमजोर होने लगते हैं।

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CJI ने कहा कि आधुनिक न्यायिक प्रबंधन में कमर्शियल कोर्ट, फैमिली कोर्ट, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और विशेष ट्रिब्यूनल जैसे समर्पित मंचों के जरिए विशिष्ट कानूनी चुनौतियों का समाधान किया जाता रहा है। नई अदालतों के गठन से न्यायाधीशों को विषय में विशेष महारत हासिल होगी, सुनवाई में निरंतरता बनी रहेगी और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता व मौलिक अधिकारों से समझौता किए बिना मुकदमों का निस्तारण तेजी से हो सकेगा।

देशभर के लिए रोल मॉडल बनेगी दिल्ली की पहल

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चीफ जस्टिस ने उम्मीद जताई कि जिस तरह दिल्ली ने पहले भी कई न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत कर देश का मार्गदर्शन किया है, उसी तरह राउज एवेन्यू की यह पहल भी एक राष्ट्रीय मॉडल बनेगी। उन्होंने कहा कि इन विशेष अदालतों के अनुभवों से मुकदमों के बोझ को कम करने और देशभर में मुकदमों की सुचारू सुनवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने न्यायाधीशों, जांच एजेंसियों, अभियोजकों, बचाव पक्ष के वकीलों और अदालत कर्मचारियों से परस्पर सहयोग बनाए रखने की अपील की।

इस कार्यक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जस्टिस ज्योति सिंह और राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट भी उपस्थित रहे।

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