फार्मेसी कॉलेजों को हर साल मंजूरी देने की नीति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र लाएगा नया कानून

सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा फार्मेसी कॉलेजों को हर साल एक-एक वर्ष के लिए मंजूरी देने की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि इस तरह की अनिश्चित व्यवस्था से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को सूचित किया कि सरकार इस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी में है। ‘नेशनल फार्मेसी कमीशन बिल’ नाम का यह विधेयक नेशनल मेडिकल कमीशन की तर्ज पर तैयार किया गया है और इसे संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश किया जा सकता है।

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सालाना मंजूरी प्रणाली पर बेंच की टिप्पणी

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय बेंच पीसीआई द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मंजूरी प्रक्रिया में अनिश्चितता से छात्रों के बीच अस्थिरता का माहौल बनता है, वहीं बाहरी कारणों से फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। जस्टिस बागची ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बी.फार्मा, एम.फार्मा और अन्य डिप्लोमा पाठ्यक्रम ऑफर करने वाले संस्थानों के पास आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च मानक की मशीनें उपलब्ध हैं, तब भी उन्हें हर साल नए लाइसेंस के लिए निर्भर रखना तर्कसंगत नहीं है।

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केंद्र ने मानी अनिश्चितता की बात

अदालत की टिप्पणियों पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि वर्तमान प्रणाली से छात्रों के लिए स्थिति काफी अप्रत्याशित हो जाती है। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेंगे। सॉलिसिटर जनरल ने बेंच को बताया कि सरकार मौजूदा ढांचे की जगह नया विधायी ढांचा लाने पर काम कर रही है और संसद के चालू सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है।

दो सप्ताह के लिए सुनवाई टली

प्रतिक्रिया में चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि अदालत का मुख्य सरोकार केवल फार्मेसी शिक्षा के लिए एक सशक्त और पारदर्शी नियामक तंत्र सुनिश्चित करना है। नए कानून के तहत संसद जो भी नीतियां तय करेगी, उससे अदालत को कोई आपत्ति नहीं होगी। संसद के जारी सत्र और प्रस्तावित विधायी बदलावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे के लिए टाल दिया है। अब इस मामले पर दो हफ्ते बाद यानी 20 अगस्त के बाद दोबारा सुनवाई होगी।

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