संसद चलो प्रदर्शन: आयोजकों पर कार्रवाई की याचिका पर इसी हफ्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपी आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट इसी सप्ताह सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। वायु सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी की ओर से दाखिल इस याचिका पर सोमवार को जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया था।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने मामले को अतिशीघ्र सूचीबद्ध करने का आग्रह किया, जिस पर शीर्ष अदालत ने इसे चालू सप्ताह में सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया।

आयोजकों की जवाबदेही और राष्ट्रीय नीति की मांग

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याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि सरकार के ढीले रवैये और उदारता के बावजूद प्रदर्शन के आयोजक लगातार भड़काऊ व गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं और समाज में मनमुटाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अदालत से मांग की कि हिंसा और अशांति फैलाने के लिए इस कार्यक्रम के आयोजकों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

इसके साथ ही याचिका में विरोध प्रदर्शनों के बाद दर्ज की जाने वाली एफआईआर और गिरफ्तारियों की प्रक्रिया को लेकर पूरे देश में एक समान राष्ट्रीय नीति लागू करने का भी अनुरोध किया गया है।

20 जुलाई के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह कानूनी पहल 20 जुलाई को मध्य दिल्ली में हुए भारी विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है, जिसमें मुख्य रूप से बड़ी संख्या में युवा और छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

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संसद भवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों ने जब सुरक्षा के लिए लगाए गए पुलिस बैरिकेड्स को लांघने का प्रयास किया, तो भीड़ को तितर-बितर करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे और लाठीचार्ज करना पड़ा था।

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