रायपुर के एक ड्राई क्लीनिंग संस्थान को ग्राहक की शादी की शेरवानी प्रेस करते समय जलाने के मामले में 14,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ड्राई क्लीनर को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार प्रथा का दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।
आयोग के अध्यक्ष दाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरुपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने 1 जुलाई को दिए अपने आदेश में पीड़ित ग्राहक को क्षतिग्रस्त शेरवानी के मूल्य के रूप में 6,000 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति के तौर पर 3,000 रुपये और मुकदमा खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का आदेश दिया।
कोयले की प्रेस से जला दी थी शेरवानी
यह विवाद 8 सितंबर 2019 का है, जब पीड़ित ग्राहक ने अशोक निर्मलकर द्वारा संचालित ड्राई क्लीनिंग दुकान पर शादी के चार जोड़े कपड़े ड्राई क्लीन और प्रेस कराने के लिए दिए थे। इन कपड़ों में दूल्हे का परिधान, कोट-सूट, घाघरा, लाचा और लगभग 12,000 रुपये मूल्य की शेरवानी शामिल थी।
कपड़ों पर स्त्री करते समय दुकान के कर्मचारियों ने कोयले वाली प्रेस का इस्तेमाल किया, जिससे शेरवानी का ऊपरी हिस्सा—दूसरे बटन के ठीक ऊपर का हिस्सा—जल गया। जब ग्राहक ने मौखिक रूप से नुकसान की भरपाई की मांग की, तो दुकान प्रबंधन ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने बताया था असंज्ञेय मामला
घटना के दिन ही ग्राहक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने मामले को असंज्ञेय अपराध (नॉन-कॉग्निजिबल ऑफेंस) मानते हुए पीड़ित को उपयुक्त अदालत या न्यायिक मंच का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी थी। इसके बाद ग्राहक ने कानूनी नोटिस भेजा और उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की।
दुकानदार के हाजिर न होने पर हुई एकपक्षीय कार्रवाई
उपभोक्ता मंच द्वारा आधिकारिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद ड्राई क्लीनिंग दुकान का कोई भी प्रतिनिधि सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुआ। दुकान की ओर से आरोपों को चुनौती देने के लिए कोई लिखित जवाब, हलफनामा या दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिसके बाद आयोग ने मामले में एकपक्षीय सुनवाई करने का निर्णय लिया।
आयोग ने अपने फैसले में पाया कि पीड़ित ग्राहक ने खरीद के मूल बिल, पुलिस शिकायत की प्रति, कानूनी नोटिस और जले हुए कपड़े की तस्वीरों सहित ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। तस्वीरों में शेरवानी के बटनों के पास जलने के स्पष्ट निशान दिखाई दे रहे थे।
आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कोयले की प्रेस से प्रेस करते समय दुकान के कर्मचारियों ने घोर लापरवाही बरती और ग्राहक की संपत्ति की सही देखभाल करने में विफल रहे। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए दुकानदार पर जुर्माना लगाया।

