इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, सिविल कोर्ट, रायबरेली के आम चुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन ‘कोषाध्यक्ष’ पद के चुनाव को एक सप्ताह के लिए 1 अगस्त 2026 तक टाल दिया है। कोर्ट ने बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी को उस अधिवक्ता की आपत्तियों पर सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है, जिनका नाम लंबे समय से लाइफ मेंबर होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची से अचानक हटा दिया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता आनंद कुमार गुप्ता 29 मार्च 1998 से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकृत (पंजीकरण संख्या UP01208/1998) एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता हैं, जिनके पास एक वैध प्रैक्टिस प्रमाण पत्र (संख्या R1-115750/2025) है। वह 2008 से सेंट्रल बार एसोसिएशन, सिविल कोर्ट, रायबरेली के लाइफ मेंबर हैं। वर्ष 1999 से 2025 तक मतदाता सूची में लगातार उनका नाम शामिल रहा है। उन्होंने बार एसोसिएशन में विभिन्न पदों पर सेवाएं दी हैं, जिनमें कई कार्यकालों (2000–2002, 2002–2004, 2008–2009) के लिए कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य (2020–2022) का पद शामिल है। इसके अलावा, वह 2025 के चुनावों में कोषाध्यक्ष पद के उपविजेता रहे थे।
8 जुलाई 2026 को निवर्तमान कार्यकारी समिति ने 2026 के चुनावों के लिए योग्य मतदाताओं की सूची एल्डर्स कमेटी को भेजी थी, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम क्रम संख्या 1563 पर दर्ज था। हालांकि, 13 जुलाई 2026 को प्रकाशित अनंतिम मतदाता सूची से बिना कोई कारण बताए उनका नाम हटा दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपनी सदस्यता और साक्ष्यों का हवाला देते हुए विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन 15 जुलाई 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
इस विलोपन से व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसमें उन्होंने अंतिम मतदाता सूची में अपने नाम को हटाए जाने की हद तक उसे रद्द करने और कोषाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने तथा चुनाव लड़ने की अनुमति देने की मांग की।
पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल और सेंट्रल बार एसोसिएशन, रायबरेली की ओर से अधिवक्ता बीरेंद्र प्रताप सिंह अदालत में पेश हुए।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का नाम हटाना मनमाना, गैरकानूनी और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत संस्था होने के नाते सेंट्रल बार एसोसिएशन अपने पंजीकृत उप-नियमों (बाय-लॉज़), मॉडल बाय-लॉज़ और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के लिए बाध्य है। यह दलील दी गई कि याचिकाकर्ता का रिकॉर्ड बेदाग है, उनके पास वैध नामांकन, प्रैक्टिस प्रमाण पत्र और कोई बकाया नहीं है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कोषाध्यक्ष पद के पसंदीदा उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की बदनीयती से उनका नाम हटाया गया।
इसके जवाब में बार एसोसिएशन के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता उस अदालत में नियमित रूप से वकालत नहीं करते हैं जिससे बार एसोसिएशन जुड़ा हुआ है, इसलिए वह वैध सदस्यता का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि 13 जुलाई 2026 को प्रकाशित अनंतिम सूची के खिलाफ याचिकाकर्ता द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।
हालांकि, बार एसोसिएशन के वकील ने यह सहमति व्यक्त की कि यदि याचिकाकर्ता पिछले दो वर्षों के पांच वकालतनामे के साथ अपनी आपत्ति प्रस्तुत करते हैं, तो एल्डर्स कमेटी लागू नियमों के अनुसार उनकी आपत्ति पर अनुकूलता से विचार कर निर्णय लेगी।
अदालत का विश्लेषण
रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता के वर्ष 2008 से बार एसोसिएशन का लाइफ मेंबर होने पर कोई विवाद नहीं है और न ही इस बात से इनकार किया गया है कि एल्डर्स कमेटी को भेजी गई सूची में उनका नाम क्रम संख्या 1563 पर शामिल था।
कोर्ट ने चुनाव के लिए तय किए गए त्वरित कार्यक्रम पर ध्यान दिया:
- 15 जुलाई 2026 (शाम 5:00 बजे): मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
- 16 जुलाई 2026 (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे): नामांकन पत्रों का वितरण
- 17-18 जुलाई 2026: नामांकन पत्र दाखिल करना, जांच और आपत्तियों का निस्तारण
- 20 जुलाई 2026 (सुबह 11:00 बजे): उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन
- 25 जुलाई 2026 (सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे): मतदान का दिन
- 26 जुलाई 2026: वोटों की गिनती
घटनाक्रम की तीव्र गति को रेखांकित करते हुए कोर्ट ने कहा: “हम इस कानून से अवगत हैं कि इस अंतिम चरण में चुनाव प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता, हालांकि, हम मतदाता सूची को अंतिम रूप देने और चुनाव कराने में दिखाई गई जल्दबाजी को नोट कर सकते हैं…”
अदालत का निर्णय
चुनाव की तेज गति या पर्याप्त अवसर दिए बिना याचिकाकर्ता का नाम हटाने के औचित्य पर आगे कोई टिप्पणी किए बिना, हाईकोर्ट ने पक्षों द्वारा दी गई सहमति के आधार पर याचिका का निस्तारण कर दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ता को दो दिनों के भीतर अपनी आपत्ति, नियमित वकालत के समर्थन में संबंधित दस्तावेज और पिछले दो वर्षों के पांच वकालतनामे जमा करने की छूट दी। एल्डर्स कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद कानून के अनुसार एक कारणयुक्त आदेश (रीज़न्ड ऑर्डर) पारित करे।
25 जुलाई 2026 को होने वाले सामान्य चुनावों को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की अनुमति देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि केवल ‘कोषाध्यक्ष’ पद का चुनाव 1 अगस्त 2026 तक के लिए स्थगित किया जाए। यदि एल्डर्स कमेटी याचिकाकर्ता को योग्य मानती है, तो उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने और चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया: “यह स्पष्ट किया जाता है कि यह आदेश वर्तमान मामले के विशेष तथ्यों और पक्षों के वकीलों द्वारा दी गई सहमति के आधार पर पारित किया गया है और इसे किसी अन्य मामले में नजीर के रूप में नहीं माना जाएगा।”
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: आनंद कुमार गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, चिट्स एंड सोसाइटीज़ लखनऊ व 2 अन्य
वाद संख्या: रिट-सी संख्या 7681/2026
पीठ: जस्टिस शेखर बी. सर्राफ, जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी
निर्णय की तिथि: 23 जुलाई 2026

