मंदिरों में राजस्व नुकसान रोकने के लिए त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड लागू करे ऑडिट सिफारिशें: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) को अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों में ऑडिट विभाग की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही को मजबूत करना है, ताकि भविष्य में मंदिरों के राजस्व में होने वाले नुकसान और गबन की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने कहा कि इन सिफारिशों को लागू करने से वित्तीय अनुशासन और सुशासन में सुधार होगा। इसके साथ ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए तय दरों से जुड़े नियमों को समान और पारदर्शी तरीके से लागू करना संभव हो सकेगा। पीठ ने TDB को इन ऑडिट सिफारिशों पर चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से अमल करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था से गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करना और उन पर जवाबदेही तय करना आसान होगा। हालांकि, अदालत ने जोर देकर कहा कि किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई से पहले उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सख्ती से पालन होना चाहिए।

कंडियूर देवस्वम ऑडिट से उजागर हुई खामियां

ऑडिट विभाग की ये सिफारिशें कंडियूर देवस्वम में आयोजित ‘मृत्युंजय होमम’ पूजा के दौरान सामने आई वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद तैयार की गई थीं। ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि सामान्य और विशेष आदेशों के बीच विरोधाभास के कारण पूजा-पाठ के शुल्क में भारी असमानता पैदा हुई, जिससे देवस्वम बोर्ड को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए स्पष्टता, वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही पर केंद्रित एक बहुआयामी रणनीति अपनाने की आवश्यकता जताई थी।

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वित्तीय पारदर्शिता और सुधार के प्रमुख उपाय

राजस्व नुकसान को रोकने के लिए ऑडिट विभाग ने मौजूदा सामान्य और विशेष आदेशों की व्यापक समीक्षा करने और पूजा दरों को तय करने के मानकों में सामंजस्य स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे। इसके साथ ही, बोर्ड के आंतरिक ऑडिट तंत्र को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में मंदिर की आमदनी पर नजर रखने के लिए स्वचालित राजस्व ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने और खातों के पूरी तरह कंप्यूटरीकरण की सिफारिश की गई है। इसके तहत अनुष्ठानों की बुकिंग से प्राप्त राशि का वास्तविक संग्रह के साथ नियमित मिलान (रीकंसीलिएशन) किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट तैयार होगी।

अतीत में हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राजस्व उत्पन्न करने वाली सभी गतिविधियों के लिए निरंतर प्रक्रिया सुधार कार्यक्रम शुरू करने की सलाह दी गई है। साथ ही, सार्वजनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मंदिरों के परिसर और उनके ऑनलाइन पोर्टल पर स्वीकृत पूजा दरों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया गया है।

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