यौन उत्पीड़न के मामलों में ‘छाती’ और ‘स्तन’ में अंतर नहीं, केरल हाईकोर्ट ने POCSO केस में सुनाया फैसला

केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यौन नीयत से किसी बच्चे की छाती को पकड़ना पोक्सो (POCSO) कानून के तहत यौन हमले का अपराध है। अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मुकदमों में आम तौर पर ‘छाती’ शब्द का प्रयोग ‘स्तन’ के समानार्थी के रूप में ही किया जाता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक आरोपी की सजा को ‘गंभीर यौन हमले’ से बदलकर ‘यौन हमला’ कर दिया और उसकी सात साल की कैद को घटाकर तीन साल कर दिया।

चिकित्सीय अंतर से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती

न्यायमूर्ति ए बधरुद्दीन ने 10 जुलाई को जारी आदेश में कहा कि पोक्सो कानून की धारा 7 के तहत यदि कोई व्यक्ति यौन मंशा के साथ किसी बच्चे के शरीर को बिना प्रवेश (पेनिट्रेशन) के छूता है या उसकी छाती दबाता है, तो वह यौन हमले का दोषी है।

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अदालत ने माना कि ऑक्सफोर्ड और वेबस्टर डिक्शनरी की परिभाषाओं के अनुसार शारीरिक और चिकित्सीय दृष्टि से ‘छाती’ और ‘स्तन’ में अंतर है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई बाल पीड़ित यह कहता है कि आरोपी ने यौन नीयत से उसकी छाती पकड़ी, तो इसका सीधा अर्थ यही निकलता है कि आरोपी ने उसके स्तन वाले हिस्से को दबोचा था। इसलिए केवल शब्दों की तकनीकी या शारीरिक भिन्नता के आधार पर पोक्सो कानून के आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता।

बचाव पक्ष के तर्क और अदालत का रुख

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील टी यू सुजीत कुमार और विंस्टन के वी ने दलील दी थी कि बच्चे की छाती को महज छूना यौन हमला नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष का कहना था कि ‘छाती’ और ‘स्तन’ दो अलग-अलग शारीरिक अंग हैं, इसलिए इस कृत्य को यौन हमले की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि आम व्यावहारिक भाषा और बाल उत्पीड़न के मामलों के संदर्भ में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में किया जाता है।

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घटना का ब्योरा और अदालत का फैसला

यह मामला 15 मई 2022 का है, जब एक 12 वर्षीय लड़के के साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने पीछे से आकर बच्चे को दबोचा, उसकी छाती दबाई और पेट पकड़ लिया। इसके बाद उसने बच्चे का हाथ पकड़कर उसे 50 रुपये का लालच दिया और पास के एक खाली मकान में चलने को कहा। पीड़ित बच्चा किसी तरह खुद को छुड़ाकर घर भागा और परिजनों को पूरी घटना बताई।

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इस मामले में निचली विशेष अदालत ने आरोपी को गंभीर यौन हमले का दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने पुनर्विचार करते हुए आरोपी को पोक्सो की धारा 7 के तहत यौन हमले का दोषी माना और सजा घटाकर तीन साल के कठोर कारावास में बदल दी। इसके अलावा अदालत ने आरोपी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे न देने पर उसे दो सप्ताह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

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