देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और धांधली रोकने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक नए और कड़े कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना और परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करना है।
यह नया विधेयक ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करेगा। इसके तहत मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट, भारी जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में पेश कर सकती है।
नए प्रस्तावित कानून की मुख्य बातें
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट: पेपर लीक से जुड़े मामलों की समय पर जांच और जल्द फैसले के लिए राज्यों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी।
- भारी जुर्माना: परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों या प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर्स के दोषी पाए जाने पर ₹1 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा रद्द होने पर उसका खर्च भी वसूला जाएगा।
- कड़ी जेल की सजा: संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों और मुख्य साजिशकर्ताओं के लिए जेल की सजा की अवधि को बढ़ाया जाएगा।
- गैर-जमानती अपराध: NTA, UPSC और SSC जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में होने वाली धांधली को गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और सरकार की कार्रवाई
कैबिनेट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में देश के छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
“यह कोई सामान्य विषय नहीं है; यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बहुत ही दर्दनाक समय है,” प्रधानमंत्री ने कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट से पीड़ित छात्रों को जल्द न्याय मिलेगा।
इसके साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में इस कानून के तहत मामलों की तुरंत सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है।
देशभर में छात्रों का प्रदर्शन और मांगें
सरकार का यह कदम NEET-UG और अन्य परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ देशभर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच आया है। कई छात्र संगठन दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
- मुआवजा: परीक्षा में अनिश्चितता और मानसिक तनाव के कारण प्रभावित या जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
- केस वापसी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस केस और FIR तुरंत वापस ली जाएं।
- परीक्षा प्रणाली में सुधार: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में पेपर लीक न हो सके।
संसद में यह बिल पेश होने के बाद इस पर बहस होगी। एक तरफ जहां सरकार का मानना है कि सख्त कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट से अपराधियों में डर पैदा होगा, वहीं शिक्षा विशेषज्ञों और छात्रों का कहना है कि सिर्फ कानून सख्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है।

