सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है। इस मामले में अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि सभी पक्षों को नोटिस जारी किया जाए। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले, लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को औपचारिक स्वीकृति दी थी।
दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग
लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अदालत का रुख करने वाली शिवसेना (यूबीटी) ने पहले अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष रखा था। पार्टी का तर्क था कि बागी सांसदों को विलय की अनुमति देने के बजाय दल-बदल विरोधी कानून के कड़े प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
लोकसभा में बदला सीटों का गणित
पिछले चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे थे। इनमें से छह सांसदों के पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल होने के बाद, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार निचले सदन में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

