महाराष्ट्र के ऐतिहासिक कोल्हापुर शहर में स्थित भास्करराव जाधव पुस्तकालय की जर्जर हालत और दुर्लभ किताबों पर मंडराते खतरे को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए नगर निगम और पुस्तकालय प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस मिलिंद एन. जाधव और जस्टिस नांदेश एस. देशपांडे की पीठ ने 14 जुलाई को एक मराठी समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए 21 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लीगल एड कमेटी के माध्यम से अधिवक्ता रितेश थोबाडे और भार्गवी पाटिल को न्याय मित्र (अमीकी क्यूरी) नियुक्त किया है।
किताबें खत्म होने के लिए पुस्तकालय कोई कबाड़खाना नहीं
डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव को रेखांकित करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आधुनिक दौर में भी पुस्तकालय समाज को ज्ञान से जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम हैं। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालय लोकतंत्र, सूचना की स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रतीक हैं। ये कम आय वाले उन विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का सहारा बनते हैं जिनके पास संसाधनों की कमी है।
अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि पुस्तकालयों को ऐसा कबाड़खाना या अटारी नहीं माना जा सकता जहां पुरानी किताबों को सड़ने या खत्म होने के लिए छोड़ दिया जाए।
मानसून की बारिश से दुर्लभ संग्रह पर खतरा
समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, रुईकर कॉलोनी स्थित पुस्तकालय भवन रखरखाव के अभाव में बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। मानसून की भारी बारिश के कारण छत में बड़े छेद हो चुके हैं और पानी का तेज रिसाव हो रहा है। दरवाजे और खिड़कियां जंग खा चुकी हैं। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो वहां रखीं 21,825 दुर्लभ किताबें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं।
यह पुस्तकालय 15 दिसंबर 1972 को पंजीकृत हुआ था, और 9 दिसंबर 1979 से कोल्हापुर नगर निगम इसकी रुईकर कॉलोनी शाखा का रख-रखाव कर रहा है। भूतल के अलावा पहली मंजिल पर 4,000 वर्ग फुट का विशाल वाचन कक्ष और एक अलग समाचार पत्र अनुभाग मौजूद है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों का मुख्य सहारा
महज 1,000 रुपये के वार्षिक शुल्क पर सुविधाएं देने वाला यह पुस्तकालय रोजाना 400 से अधिक नियमित पाठकों की सेवा करता है। इनमें अधिकांश छात्र उचगांव, विक्रमनगर, टेमलाईवाड़ी, कदमवाड़ी, सदर बाजार, मुक्तासैनिक वसाहत, जाधव वाडी और रुईकर कॉलोनी जैसे आसपास के इलाकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। छात्रों ने परिसर की खाली जमीन को आधुनिक अध्ययन केंद्र और कार्यशाला स्थल के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया है।
ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि कोल्हापुर का पुस्तकालय इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। आजादी से पूर्व 1945 में देश का पहला सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम पारित करने का गौरव कोल्हापुर को ही प्राप्त हुआ था। ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी दुखद है।
निगम के दावों पर सवाल, 18 अगस्त को अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोल्हापुर नगर निगम के वकील ने पीठ को बताया कि भवन की मरम्मत के लिए नवंबर 2025 में वर्क ऑर्डर जारी किया गया था और अप्रैल 2026 से काम शुरू हो चुका है। हालांकि, कार्य के सटीक स्वरूप की जानकारी नहीं दी गई।
अखबार में छपी रिपोर्ट और तस्वीरों के विपरीत दावों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम को आधिकारिक वर्क ऑर्डर और जारी मरम्मत कार्य की हालिया तस्वीरें अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने न्याय मित्रों को निर्देश दिया है कि वे 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले पुस्तकालय भवन का दौरा कर स्थिति का जायजा लें और आवश्यक सुझावों के साथ एक विस्तृत जनहित याचिका का प्रारूप प्रस्तुत करें।

