राजस्थान बस धमाका: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की मुख्य आरोपी की फांसी, नए सिरे से सुनवाई के दिए निर्देश

राजस्थान के दौसा जिले में करीब तीन दशक पहले हुए दर्दनाक बस धमाके के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने मुख्य दोषी ठहराए गए अब्दुल हमीद की मृत्युदंड की सजा को रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि पिछले मुकदमे के दौरान हमीद को सही कानूनी सहायता नहीं मिल सकी थी। इसके साथ ही अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया, जबकि छह अन्य लोगों को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपीलों को भी खारिज कर दिया।

नए सिरे से सुनवाई के लिए सख्त दिशानिर्देश

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने 22 मई 1996 को आगरा से बीकानेर जा रही बस में हुए इस विस्फोट को लंबा समय बीत जाने के कारण राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे इस मामले की नए सिरे से सुनवाई के लिए किसी विशेष अदालत को नामित करें।

पीठ ने स्पष्ट किया कि नए ट्रायल की अध्यक्षता सत्र अदालत के मुकदमों का गहन अनुभव रखने वाले किसी वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए। कोर्ट ने इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया को एक साल के भीतर संपन्न करने का निर्देश दिया है। पेशे से डॉक्टर अब्दुल हमीद को अपनी पसंद का कानूनी प्रतिनिधि (वकील) चुनने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।

अन्य आरोपियों की रिहाई और कानूनी पृष्ठभूमि

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सालों से चले आ रहे इस मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। इससे पहले जुलाई 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने हमीद की मौत की सजा को बरकरार रखा था, क्योंकि उसे बस में बम लगाने का मुख्य जिम्मेदार माना गया था। उसी फैसले में हाईकोर्ट ने विस्फोटक सामग्री जुटाने के आरोपी पप्पू उर्फ सलीम की उम्रकैद को भी कायम रखा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सलीम को बरी कर दिया है। शीर्ष अदालत ने 2 दिसंबर 2019 को हमीद की फांसी पर रोक लगा दी थी।

2019 के अपने फैसले में हाईकोर्ट ने छह अन्य सह-आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें जम्मू-कश्मीर के पांच निवासी—जावेद खान, लतीफ अहमद, मोहम्मद अली भट्ट, मिर्जा निस्सा हुसैन और अब्दुल गनी—तथा आगरा का रहने वाला रईस बेग शामिल हैं। राज्य सरकार ने इनके बरी होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके अलावा, 2014 में बांदीकुई कोर्ट द्वारा फारूक अहमद खान को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था, और सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य की चुनौती को खारिज कर दिया।

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जयपुर स्टेडियम मामले से जुड़ाव

दौसा में हुए इस भीषण बम विस्फोट में 14 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस मामले के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद पर 26 जनवरी 1996 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में विस्फोटक लगाने के एक अन्य मामले में भी कथित रूप से शामिल होने का आरोप है।

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