सबरीमाला यात्रा: भीड़ प्रबंधन के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल, केरल हाईकोर्ट ने 15 नवंबर तक काम पूरा करने के दिए निर्देश

केरल हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को निर्देश दिया है कि आगामी मंडलकाला-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने इस सीजन से पहले 17.67 करोड़ रुपये की एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित भीड़ प्रबंधन योजना को पूरी तरह लागू करने को कहा है, ताकि यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।

जस्टिस राजा विजयाराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने यह निर्देश टीडीबी द्वारा वार्षिक तीर्थयात्रा की तैयारियों को लेकर की गई समीक्षा के बाद जारी किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा, स्वच्छता और उनके समग्र कल्याण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए। यह आदेश हाईकोर्ट द्वारा खुद संज्ञान लेकर दर्ज की गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रा शुरू होने से पहले सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होगा सुरक्षा तंत्र

टीडीबी ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि पारंपरिक पुलिस बंदोबस्त योजना में इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। जिला पुलिस प्रमुख और मुख्य पुलिस समन्वयक द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर सबरीमाला में एक ‘एकीकृत तीर्थयात्री सुरक्षा, निगरानी और विनियमन मंच’ स्थापित किया जाएगा। यह नया डिजिटल प्लेटफॉर्म पुराने पारंपरिक सुरक्षा उपायों के बजाय डेटा और आधुनिक तकनीकों पर आधारित पूर्वानुमान प्रणाली (प्रेडिक्टिव मॉडल) के तहत काम करेगा।

ड्रोन और स्मार्ट पार्किंग जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल

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इस नई तकनीकी प्रणाली के तहत सुरक्षा ढांचे में एआई वीडियो एनालिटिक्स, भीड़ के घनत्व की निगरानी (क्राउड डेंसिटी मैपिंग), लोगों की गिनती, स्मार्ट पार्किंग, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) आधारित वाहन विश्लेषण, ड्रोन सर्विलांस, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) विज़ुअलाइज़ेशन और भीड़ के पूर्वानुमान से जुड़ी तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इन सभी प्रणालियों को आपस में जोड़कर एक एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

पहले चरण की लागत और नियंत्रण केंद्र

बोर्ड ने हाईकोर्ट को बताया कि इस पूरी योजना को चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में पम्बा और सन्निधानम में मुख्य नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसमें सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती और तीन साल का सालाना रखरखाव अनुबंध (एएमसी) भी शामिल है, जिस पर लगभग 17.67 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। टीडीबी ने इस पहले चरण को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है और इसे इसी सीजन से लागू करने का फैसला लिया है।

पम्बा से नियंत्रित होगी श्रद्धालुओं की आवाजाही

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सुरक्षा प्रणाली के तहत पम्बा में एक बड़ा अंतर-विभागीय नियंत्रण कक्ष क्रियाशील किया जाएगा। निलक्कल, ट्रेक रूट, मराकोट्टम, वलियानादापंदल और सन्निधानम जैसे प्रमुख पारगमन बिंदुओं से मिलने वाले वास्तविक समय के डेटा (रियल-टाइम इनपुट) के आधार पर पम्बा नियंत्रण कक्ष से श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियमित किया जाएगा। इसके अलावा, बोर्ड ने केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई आपदा न्यूनीकरण और तैयारी नियमावली को भी मंजूरी दे दी है, जिसे इस यात्रा के दौरान अपनाया जाएगा।

कचरा प्रबंधन के लिए विशेष अभियान

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मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने के लिए भी टीडीबी ने एक विशेष कार्ययोजना बनाई है। बोर्ड ने सुचित्व मिशन और क्लीन केरल कंपनी के साथ मिलकर एक आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रोटोकॉल लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत मंदिर क्षेत्र से सभी प्रकार के कचरे, कबाड़ और ई-कचरे को हटाया जाएगा। हाईकोर्ट की पीठ ने बोर्ड के इन सुधारात्मक कदमों की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावित प्रणालियों को 15 नवंबर को तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले हर हाल में चालू कर दिया जाए।

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