मथुरा कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 अगस्त तक टाली सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई को 25 अगस्त तक के लिए टाल दिया है। अदालत ने यह निर्णय दोनों पक्षों के साझा अनुरोध पर लिया है, क्योंकि वर्तमान में मथुरा की जिला अदालत में इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अवनीश सक्सेना ने दोनों पक्षों की दलीलों को दर्ज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जिला अदालत में मध्यस्थता की कार्यवाही जारी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लोक अदालत की कार्यवाही के लिए 21 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक की तारीखें निर्धारित की हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित करने की याचिका को स्वीकार कर लिया।

विवादित स्थल पर गतिविधियों को रोकने की मांग

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से नया आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। इस याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे विवादित परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति या समूह के प्रवेश पर रोक लगाएं।

आवेदन में कहा गया है कि परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की बैठक, सभा, समारोह या ‘कार सेवा’ के आयोजन से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति को खतरा पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने इस नए आवेदन पर विपक्षी पक्षों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है।

अदालती लड़ाई की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद मथुरा में मुगलकालीन शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्षकारों का दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण मुगल शासक औरंगजेब के कार्यकाल में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था।

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भूमि के मालिकाना हक को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से अब तक कुल 18 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इन मुकदमों के जरिए विवादित जमीन का पूरा कब्जा हासिल करने, मस्जिद के ढांचे को हटाने, वहां मंदिर की पुनर्स्थापना करने और परिसर में किसी भी तरह के बदलाव के खिलाफ स्थायी रोक लगाने की मांग की जा रही है।

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