कैथल पुलिस चौकी हमला: हाईकोर्ट ने नाबालिग आरोपी को दी जमानत, सोशल मीडिया की लत को हिरासत का आधार मानने से किया इनकार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के कैथल जिले में साल 2025 में हुए एक पुलिस चौकी ग्रेनेड हमले के नाबालिग आरोपी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया की लत, इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग या दोस्तों के प्रभाव जैसी बातों को आधार बनाकर किसी किशोर की जमानत याचिका खारिज नहीं की जा सकती।

जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कैथल की चिल्ड्रन कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) और जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड के उन पिछले फैसलों को पलट दिया, जिनमें इन कारणों का हवाला देकर नाबालिग को राहत देने से मना कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालतों के तर्क जूवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की धारा 12 के कानूनी मानकों के अनुकूल नहीं हैं।

निचली अदालतों के फैसलों को किया रद्द

इस नाबालिग याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी को पहले जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड और फिर कैथल की चिल्ड्रन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। निचली अदालतों का तर्क था कि चूंकि आरोपी के पिता का निधन हो चुका है और वह सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा सक्रिय रहता है, इसलिए उसे खुद के सुधार के लिए हिरासत में रखना जरूरी है। उनका मानना था कि पारिवारिक देखरेख की कमी और सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते वह आगे भी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हो सकता है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हो जाने का यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जा सकता कि बच्चा पूरी तरह से पारिवारिक नियंत्रण या देखरेख से महरूम हो गया है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या परिवार का कोई अन्य बुजुर्ग सदस्य उसकी निगरानी के लिए मौजूद है या नहीं।

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एक साल से अधिक समय से हिरासत में है आरोपी

अदालत ने अपने फैसले में ध्यान दिलाया कि आरोपी किशोर का पहले से कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह पिछले 1 साल, 2 महीने और 12 दिन से हिरासत में है। जूवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि कानूनन किसी भी किशोर आरोपी को सामान्य तौर पर जमानत दी जानी चाहिए, जब तक कि उसे रोकने के कोई विशेष कानूनी कारण न हों।

कैथल पुलिस चौकी पर हुआ था ग्रेनेड हमला

यह मामला 6 अप्रैल 2025 को सुबह करीब 5:20 बजे कैथल की एक पुलिस चौकी के परिसर में स्थित इमारत के पीछे हुए धमाके से जुड़ा है। पुलिस जांच में यह पुष्टि हुई थी कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर यह ग्रेनेड हमला किया गया था। इस ब्लास्ट के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने 18 अप्रैल 2025 को आरोपी छात्र को गिरफ्तार किया था, जो उस समय करीब 17 साल और 10 महीने का था और आईटीआई में पढ़ाई कर रहा था।

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बचाव पक्ष और सोशल रिपोर्ट की दलीलें

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विवेक शर्मा ने तर्क दिया कि इंटरनेट के अधिक इस्तेमाल या दोस्तों के बहकावे में आने को केवल इस आधार पर आतंकी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बच्चे की आधिकारिक सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि जमानत पर रिहा होने से उसके शारीरिक, मानसिक या नैतिक विकास को कोई खतरा होगा या इससे न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होगी।

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अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि सोशल रिपोर्ट में केवल बच्चे की इंटरनेट की आदतों और साथियों के प्रभाव का जिक्र है, जो जमानत रोकने के कानूनी आधार नहीं हैं। वहीं, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहीं डिप्टी एडवोकेट जनरल छवि शर्मा ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।

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