केरल के कन्नूर में एक जिला उपभोक्ता आयोग ने एक मैरिज ब्यूरो को ग्राहक से ली गई रजिस्ट्रेशन फीस वापस करने और मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है। मैरिज ब्यूरो पर आरोप है कि उसने नौ साल की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी ग्राहक को शादी के लिए एक भी उपयुक्त रिश्ता नहीं दिलाया। आयोग ने इस मामले में मैरिज ब्यूरो के उपस्थित न होने के चलते एकतरफा फैसला सुनाया है।
कन्नूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने श्रीचक्र मैरिज ब्यूरो को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को रजिस्ट्रेशन फीस के 3,000 रुपये वापस लौटाए। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के एवज में 3,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष रवि सुशा, सदस्य मौलीकुट्टी मैथ्यू और सजीश के. पी. की पीठ ने यह आदेश 30 जून को जारी किया।
तय शर्तों के मुताबिक, मैरिज ब्यूरो को 30 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करना होगा। यदि एजेंसी तय समय सीमा में भुगतान करने में विफल रहती है, तो आदेश की तारीख से लेकर पूरी रकम चुकाए जाने तक, 3,000 रुपये की मूल फीस पर नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज लागू होगा।
क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता, जो एक नर्सिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं, ने नवंबर 2016 में एक विज्ञापन देखने के बाद इस मैरिज ब्यूरो में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। इसके लिए उन्होंने 3,000 रुपये की फीस दी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका यह प्रोफाइल बिना किसी तय वैधता अवधि (वैलिडिटी) के एक्टिव था और इसके लिए कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई थी।
प्रोफेसर ने उपभोक्ता फोरम में दायर अपनी शिकायत में बताया कि मैरिज ब्यूरो ने शुरू में उन्हें कासरगोड की एक संभावित दुल्हन से मिलवाने का भरोसा दिया था। हालांकि, पैसे लेने के बाद एजेंसी ने कोई बैठक नहीं कराई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि हर साल मैरिज ब्यूरो केवल अपना वादा दोहराता रहा, लेकिन नौ सालों में एक भी रिश्ता सामने नहीं लाया।
पारिवारिक परेशानियां और मानसिक तनाव
पीड़ित प्रोफेसर ने बताया कि उनके बुजुर्ग माता-पिता लंबे समय से उनकी शादी का इंतजार कर रहे थे। इसी इंतजार के बीच, अक्टूबर 2025 में उनके पिता का कैंसर के कारण निधन हो गया, जबकि उनकी मां भी लगातार बीमार चल रही हैं। प्रोफेसर ने शिकायत में कहा कि मैरिज ब्यूरो की इस लापरवाही के कारण उन्हें भारी मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। उन्होंने आयोग से रजिस्ट्रेशन फीस की वापसी के साथ-साथ 15,000 रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
मैरिज ब्यूरो की लापरवाही पर सख्त रुख
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि श्रीचक्र मैरिज ब्यूरो को नोटिस भेजे जाने के बाद भी वह सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं हुआ और न ही उसने अपनी ओर से कोई लिखित जवाब दाखिल किया। इस वजह से आयोग ने यह एकतरफा (ex parte) आदेश पारित किया।

