दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य से जुड़ी एक जनहित याचिका पर कल यानी गुरुवार को तत्काल सुनवाई करने का फैसला किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले में बुधवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
वकीलों की हड़ताल के कारण बुधवार को टली सुनवाई
बुधवार को अदालत को इस मामले की सुनवाई टालनी पड़ी क्योंकि सरकार की ओर से कोई भी वकील या अधिकारी पीठ की सहायता के लिए मौजूद नहीं था। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिला अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाए जाने के विरोध में काम का बहिष्कार कर रखा है। सरकारी वकीलों की गैर-मौजूदगी के बावजूद पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कल ही इस पर अगली सुनवाई तय की है।
नीट परीक्षा विवाद को लेकर प्रदर्शन
सोनम वांगचुक बीते 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वे वहां कॉकरोच जनता पार्टी के पिछले 25 दिनों से चल रहे आंदोलन में शामिल हुए हैं। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में हुई कथित धांधलियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने की तुरंत दखल देने की मांग
यह जनहित याचिका राकेश कुमार सैनी ने दायर की है, जो बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। सैनी ने कोर्ट के सामने चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, जहां पूरे देश के सामने एक नागरिक की जान खतरे में पड़ी हुई है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वह संबंधित अधिकारियों को सोनम वांगचुक के साथ बातचीत शुरू करने और उनकी मांगों पर चर्चा करने का निर्देश दे। इसके साथ ही याचिका में वांगचुक को तत्काल उचित चिकित्सा उपचार, आपातकालीन देखभाल और पोषण संबंधी सहायता देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि कार्यकर्ता की जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन कराने का भी निर्देश दिया जाए।

