कपूरथला मेयर चुनाव मामला: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार से तलब किया 8 जुलाई की बैठक का पूरा रिकॉर्ड

कपूरथला नगर निगम के मेयर चुनाव में कथित धांधली को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह 8 जुलाई को हुई उस पहली बैठक की कार्यवाही का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष पेश करे, जिसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव कराने का दावा किया गया था। जस्टिस दीपक सिबल और जस्टिस रूपिंदर चहल की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंगलवार के लिए नोटिस जारी किया है।

यह मामला कपूरथला के विधायक और नगर निगम के पदेन सदस्य राणा गुरजीत सिंह तथा 26 नवनिर्वाचित पार्षदों द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर हुए इस चुनाव को पूरी तरह से गैर-कानूनी, अलोकतांत्रिक और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई साजिश बताया है। वरिष्ठ वकील चेतन मित्तल, कुणाल मुलवानी और ऋत्विक गर्ग के माध्यम से दायर इस याचिका में 8 जुलाई की बैठक की पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई है।

बहुमत की अनदेखी और धांधली के आरोप

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कपूरथला नगर निगम के कुल 51 वोटरों (50 पार्षद और 1 विधायक) में से उनके पास 27 वोटों का स्पष्ट बहुमत है, जबकि सत्ताधारी दल के खेमे में केवल 24 सदस्य हैं। याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट के 7 जुलाई के आदेश के तहत 8 जुलाई को नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाने के लिए पहली बैठक बुलाई गई थी। आरोप है कि अधिकारियों ने पार्षदों को शपथ तो दिलाई, लेकिन मेयर पद के लिए बिना कोई मतदान या तय कानूनी प्रक्रिया अपनाए ही सत्ताधारी दल के उम्मीदवार को सीधे विजेता घोषित कर दिया।

राणा गुरजीत सिंह ने याचिका में आरोप लगाया कि बैठक के दौरान दोनों गुटों को अलग-अलग बैठाया गया था। निगम कमिश्नर ने कथित तौर पर सिर्फ 24 सदस्यों वाले सत्ताधारी दल के गुट को संबोधित किया और उनके एक सदस्य से मेयर पद के लिए नाम का प्रस्ताव मांग लिया। इसके बाद वार्ड नंबर 35 के पार्षद नरिंदर सिंह को अवैध रूप से मेयर घोषित कर दिया गया, जबकि 27 सदस्यों वाले बहुमत गुट को अपना उम्मीदवार खड़ा करने या वोट डालने का कोई मौका ही नहीं दिया गया।

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वीडियोग्राफी के आदेशों की धज्जियां उड़ाईं

याचिका में नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी गंभीर मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद बैठक की कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। जबकि जालंधर डिवीजन के कमिश्नर ने 5 जुलाई को ही कपूरथला निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर स्थानीय सरकार विभाग के 5 जून के निर्देशों के तहत पूरी बैठक की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए थे।

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याचिका के अनुसार, इस धांधली के विरोध में विधायक राणा गुरजीत सिंह ने मौके पर अपने मोबाइल से फेसबुक लाइव वीडियो भी बनाया, ताकि बैठक की वास्तविक स्थिति और वहां मौजूद पार्षदों की संख्या सार्वजनिक की जा सके। आरोप है कि उनके विरोध जताते ही रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तुरंत बैठक छोड़कर चले गए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि निगम कमिश्नर और सत्ताधारी दल के 24 पार्षद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव कराए बिना ही वहां से चले गए, जिससे पूरी प्रक्रिया कानून की नजर में अधूरी और बेअसर रह गई। इसके अलावा, चुनाव के नतीजों को न तो कहीं दर्ज किया गया और न ही नगर निगम की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

स्वतंत्र जांच और नए चुनाव की मांग

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 के नियमों के तहत किसी स्वतंत्र पर्यवेक्षक की देखरेख में नए सिरे से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराए जाएं। इसके साथ ही, 8 जुलाई को हुई इस घटना की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अपील की है कि बैठक से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और उन्हें अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए।

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