मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: माओवादी फंडिंग मामले में फंसी छात्रा की मेडिकल डिग्री पर रोक रहेगी

मद्रास हाईकोर्ट ने उस एमबीबीएस छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसकी डिग्री कॉलेज ने रोक रखी है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के इस आरोप के बाद की गई थी कि छात्रा की पढ़ाई की फीस प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के लिए जुटाई गई रंगदारी की रकम से भरी गई थी।

चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने 17 जून के अपने फैसले में सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने पूजा कुमारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चेन्नई के चेट्टीनाड एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड एजुकेशन द्वारा उनके सर्टिफिकेट रोके जाने को चुनौती दी थी। एनआईए की जांच के बाद छात्रा की 1.13 करोड़ रुपये की ट्यूशन फीस को कुर्क कर लिया गया था, जिसके चलते कॉलेज ने बकाया फीस का हवाला देते हुए डिग्री देने से मना कर दिया।

अदालत ने साफ किया कि भले ही छात्रा खुद आरोपी नहीं है, लेकिन वह किसी अपराध से अर्जित संपत्ति का लाभ उठाने का अधिकार नहीं जता सकती। अदालत ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, टेरर फंडिंग और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आपराधिक संपत्तियों की जब्ती से जुड़ा एक बेहद जटिल मामला है।

माओवादी कनेक्शन और एनआईए की जांच

इस मामले की शुरुआत 2021 में एनआईए की रांची इकाई द्वारा दर्ज एक केस से होती है। एजेंसी के अनुसार, बिहार और झारखंड में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन को दोबारा सक्रिय करने के लिए ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों से जबरन वसूली की गई थी। इस पैसे का मकसद संगठन को मजबूत करना और हथियार खरीदना था।

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एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, छात्रा के भाई तरुण कुमार और चाचा प्रद्युम्न शर्मा पर माओवादी संगठन के लिए वसूली करने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि छात्रा की शिक्षा के लिए जमा की गई रकम सीधे तौर पर इसी वसूली वाले पैसे से जुड़ी है। तरुण कुमार को 2022 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने भाकपा (माओवादी) के नाम से पर्चे बांटकर जबरन वसूली की थी।

बचाव पक्ष के तर्क और जमानत की स्थिति

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सुनवाई में पूजा कुमारी ने तर्क दिया कि वह मामले में संदिग्ध नहीं है और शैक्षणिक प्रमाणपत्र बाजार में बिकने वाली कोई वस्तु नहीं हैं, जिन्हें बकाया फीस के लिए गिरवी रखा जा सके। वहीं, पूजा और उनके भाई के वकील उज्ज्वल के. प्रियदर्शी ने बताया कि एनआईए द्वारा कुर्क की गई रकम केवल फीस के लिए इस्तेमाल हुई थी और इसका किसी भी आतंकी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।

वकील ने कहा कि यह रकम कानूनी तौर पर ‘आतंकवाद से अर्जित आय’ है या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट करेगा। उन्होंने बताया कि डिग्री रोके जाने के कारण पूजा अपनी पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।

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दूसरी ओर, तरुण कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा है। झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उसकी जमानत याचिकाएं पहले खारिज हो चुकी हैं। हालांकि, फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे छह महीने बाद ट्रायल कोर्ट में नई याचिका लगाने की छूट दी थी। यह अवधि खत्म होने के बाद ट्रायल कोर्ट ने फिर से जमानत अर्जी खारिज कर दी। अब मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिसने मंगलवार को तरुण की नई जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी किया है।

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