बरेली हिंसा: भड़काऊ भाषण और भीड़ को उकसाने के आरोपी तौकीर रजा की जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले के मुख्य आरोपी तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने 5 जून को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी को रिहा करने से क्षेत्र में फिर से सांप्रदायिक तनाव भड़कने और शांति-सौहार्द बिगड़ने की गंभीर आशंका है। कोर्ट ने तौकीर रजा को इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता माना है।

कानून और संप्रभुता को चुनौती देने वाले नारे

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चश्मदीदों के बयानों और वीडियो फुटेज से यह साफ होता है कि तौकीर रजा ने ही एक सार्वजनिक सभा में भड़काऊ भाषण देकर मुस्लिम समुदाय के युवाओं को इस्लामिया इंटर कॉलेज में जुटने के लिए उकसाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य साजिशकर्ता होने के नाते, भीड़ द्वारा की गई हिंसा और तोड़फोड़ के लिए आरोपी को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।

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इसके साथ ही कोर्ट ने मार्च के दौरान लगाए गए “गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा” के नारों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। जस्टिस देशवाल ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ नारे सीधे तौर पर देश की कानून व्यवस्था, संप्रभुता और अखंडता को खुली चुनौती देते हैं। यह एक तरह से सशस्त्र विद्रोह को बढ़ावा देने जैसा है, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत दंडनीय होने के साथ-साथ इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

बरेली में इस तरह भड़की थी हिंसा

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला पिछले साल 26 सितंबर का है, जब तौकीर रजा ने एक विशेष समुदाय के लोगों को बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में इकट्ठा होने का आह्वान किया था। उस समय सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। इसके बावजूद करीब 200 से 250 लोगों की भीड़ मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की तरफ बढ़ने लगी।

पुलिस अधिकारियों ने जब भीड़ को रोकने और समझाने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने उनकी चेतावनियों को अनसुना कर दिया। मार्च में शामिल लोग हाथों में बोर्ड लिए बेहद आक्रामक नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब भीड़ जबरन आगे बढ़ने पर अड़ गई और हिंसक हो गई।

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इस दौरान हिंसक भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, तेजाब (एसिड) की बोतलें फेंकीं और पेट्रोल बम चलाए। भीड़ की तरफ से फायरिंग भी की गई। इस हिंसक झड़प में दो पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए और कई पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी गई।

पुराने आपराधिक इतिहास का हवाला

जमानत याचिका को नामंजूर करते हुए कोर्ट ने तौकीर रजा के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी आधार बनाया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का इसी तरह के मामलों में पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि जेल से बाहर आने के बाद वह फिर से किसी खास समुदाय को भड़का सकते हैं, जिससे इलाके की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

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